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'साला 'संसद में तमतमाने का सबब क्या है

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आख़िर इस तमतमाने का सबब क्या है? क्यों ये नेता अपने क्रोध पर क़ाबू नहीं कर पाते ? क्यों लोकतंत्र के मंदिर में इनका आवेश चरम पर होता है ? यक़ीनन गृहमंत्री की इस भाव–भंगिमा और तेवर के बाद कि 'आपकी मुनसिफ़ी से नहीं चलेगी  संसद   और मेरे बोलने का क्रम मैं तय करूँगा' ने बता दिया है कि वे दलों के बीच कैसा संबंध रखना चाहते हैं। यह दृश्य जिसने भी देखा वह तकलीफ़ में आ गया कि गृहमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के बीच संवाद किस स्तर तक पहुंच गया है। ये जो आपा खोना है इस पर तो भारतीय प्राचीन ग्रंथ आख्यानों से भरे पड़े हैं। एक से एक बेहतरीन उदाहरण हैं  मनसा,वाचा, कर्मणा को क़ाबू में रखने के लिए। गीता में तो बहुत स्पष्ट है कि बुद्धिमान व्यक्ति का मन, शब्द और कर्म पर नियंत्रण बहुत ज़रूरी है। अनदेखा तो नेता प्रतिपक्ष को भी नहीं किया जा सकता क्योंकि संवाद जो संयम की सीमा-रेखा लांघ गया, उसके दूसरे छोर पर वे थे।  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तो लगातार चुनाव जीतने वाली, सबसे बड़ी पार्टी के सशक्त नेता हैं फिर क्यों उनका ग़ुस्सा सतह पर आ गया। नेता प्रतिपक्ष लगातार चुनाव हार रहे हैं ,उनके पास ढेरों सवाल हैं...

इंद्रप्रस्थ में महाभारत और राजदंड

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महाभारत ग्रन्थ में इंद्रप्रस्थ नाम के एक नगर का उल्लेख है जिसे पांडवों ने बसाया था। उस शहर और उसके महल में हैरान कर देने वाला शिल्प और जादू था जो अच्छों-अच्छों को भ्रमित कर देता था। ऐसा लगता था जैसे आगे दीवार है लेकिन वहां से गुज़रा जा सकता था। जहाँ लगता कि आईना या दरवाज़ा है वह अभेद्य था । फ़र्श ऐसा कि पांवों के नीचे झरने बह रहे हों ,और अर्श हज़ारों दीयों और कंदीलों की रौशनी से नहाया हुआ। झूमर नई नक्काशी और चांदनी का मिलाप थे। इसी चकाचौंध में जब दुर्योधन का पांव फिसला तो द्रौपदी व्यंग्य से कह उठी -"अंधे का पुत्र अंधा! " विद्वान् कहते हैं यही महाभारत की जड़ था। दरअसल  इंद्रप्रस्थ पहले खांडवप्रस्थ का खंडहर था जिसे शकुनि ने पांडवों को शांत कर लेने के लिए दे दिया था। बाद में श्रीकृष्ण और अर्जुन ने इसे विश्वकर्मा और मयासुर के सहयोग से स्वर्ग से सुंदर बना दिया था। विश्वकर्मा को दुनिया का पहला आर्किटेक्ट भी कहा जाता है।  मयासुर ने अपनी माया से उस   खंडहर में पड़ा दिव्य रथ ,गदा ,धनुष और अक्षय गांडिव अर्जुन को दिया था और कहा था की इस तरकश के तीर कभी ख़त्म नहीं होंगे। ये सब महाभारत...

मुद्दा बनाओ और घेर लो

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आज की राजनीति में जनहित और नएपन के नाम पर केवल इतना ही है,  रोज़ मुद्दे पैदा करो और घेर लो। फिर इसी पर बहस होगी,इसे ही चलाया जाएगा। बंद समाज या ऐसे भीतरी इलाके जहां जनजागृति अब भी पहुंची नहीं है वहां भी कुछ ऐसा ही होता है, खासतौर पर महिलाओं के साथ। बेड़ियों में बंद  समाज को यह स्वीकारना बड़ा मुश्किल होता था कि स्त्री भी बोले या अपने हक़ की बात करे। समाज के ठेकेदार उस ढांचे को बिलकुल भी क्षति नहीं पहुंचाना चाहते  जिसमें स्त्रियां चुप हैं। कभी-कभार एक दो महिलाएं अचानक अपने हक के लिए लड़ती हुई नज़र भी आती हैं  तो कह दिया जाता है कि इस पर प्रेत का साया है। उसे भोपे,तांत्रिक और बाबाओं कर हवाले कर दिया जाता है । इस पर भी जो बात न बने तब  'नेरेटिव’ सेट किया जाता कि यह स्त्री तो डायन है ,चुड़ेल है बच्चों को खा जाती है। यह नेरेटिव स्थापित होते ही कुछ तेज तर्रार तत्व सक्रिय हो जाते और गांव में उस स्त्री का निकलना मुश्किल हो जाता और डायन-डायन कह कर उसे घेर लिया जाता है । भारत में आज भी महिलाओं से जुड़ी यह दर्दनाक हकीकत सामने आती रहती है और राज्य विशेष को इस शब्द डायन पर प्रति...

तू एक ज़लील सी गाली से बेहतरीन नहीं

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  राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में लोकसभा और राज्यसभा में सदस्यों ने जो वक्तव्य दिए वे ऐसे मालूम होते थे जैसे 'तुम कहो खेत तो मैं कहूं खलिहान'। कई बार लगा कि जैसे फ़र्ज़ी रण लड़े जा रहे हों। फिर बीच-बीच में बड़े शायरों की नर्म सी शायरियों को लाया जाता था। पक्ष-विपक्ष दोनों के सदस्य कई बड़े कवियों की आड़ में कह तो बहुत कुछ कह रहे थे लेकिन लगता यही था कि इस ओर से आएगा तो उन पर सही होगा और उस ओर से आएगा तो इन पर सही हो जाएगा। विपक्ष के वक्तव्य में सब तरफ़ अंधेरा दिखाई दे रहा था तो सत्ता पक्ष को सब कुछ सूरज की तरह चमकीला और उज्ज्वल। चांद, तारों और जुगनुओं का तो जैसे कोई वजूद ही नहीं था यहां। सत्तापक्ष की जिम्मेदारी बड़ी होती है और उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री का भाषण देश की हकीकत से रूबरू कराता हुआ, अपने शासन के गुण-दोषों की गणना कराते हुए राष्ट्रपति को धन्यवाद देगा। उनका संबोधन सुनते हुए लगा कि देश में हरेक परिवार के पास अपना पक्का घर और हर महिला धुंए से  मुक्त होकर मुस्कुराते हुए खाना बना रही है। ... और तो और उसके महीने के कठिन दिनों के लिए सैनिटरी नैपकिन भी प्रधानमंत...