चीन की चाल देख थमा अमेरिका और हम चुप
दुनिया की बहुप्रतीक्षित मुलाक़ात गुरुवार को दक्षिण कोरिया के शहर बुसान में हो गई। वहां ये दो शक्तिशाली देश ऐसे मिले जैसे तलाक की नौबत तक पहुंचे किसी जोड़े की अक्ल अचानक ठिकाने पर आ गई हो। ये वही ट्रंप हैं जिन्होंने दो महीने पहले कहा था कि भारत और रूस दोनों ही डीपेस्ट और डार्केस्ट चीन के साथ नत्थी हो गए हैं और हमने उन्हें खो दिया है। अब उनकी छलकती ख़ुशी देखकर लग रहा है जैसे चीन यकायक बहुत रोशन और चमकीला हो गया है। नया यह है कि अमेरिका और चीन मिल लिए हैं और किसी भी पक्ष ने गिरकर समझौता नहीं किया है । द्विपक्षीय संबंध लेन-देन और साझे हितों पर चलते हैं। वे दिन लद गए जब दुनिया के धनी मुल्क कमज़ोर मुल्कों की आर्थिक मदद करना अपना दायित्व समझते थे। अब इस हाथ दे और उस हाथ ले का ज़माना है। अमेरिका ने चीन पर टैरिफ़ क्या लादा तो चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स की अपनी नीति बदल उसका निर्यात ही रोक दिया,फेंटेनिल के निर्यात पर नियंत्रण हटा दिया। अमेरिका को बातचीत के लिए आगे आना ही पड़ा और अब चीन अमेरिकी किसानों का सोयाबीन,ज्वार आदि ख़रीदने को राज़ी हो गया और बदले में अमेरिका ने 57 फ़ीसदी के टैरिफ़ ...