कमंडल को चाहिए मंडल का टेका
अब तक कमंडल से अपनी राजनीति को चमकाने वालों को अचानक मंडल की याद आ गई है, वह भी तब जब देश पहलगाम आतंकी हमले के बाद सरकार से बड़े एक्शन की उम्मीद कर रहा था। मुख्य धारा के मीडिया ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ऐसा माहौल तैयार कर दिया था कि लगने लगा था कि सरकार घर में घुसकर मारने की नीति टाइप किसी कदम का खुलासा देशवासियों से करेगी। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति ने आगामी जनगणना के साथ जाति की गिनती कराने का फ़ैसला कर लिया। आज़ादी के बाद पहली बार देश के नागरिकों से उनकी जाति पूछी जाएगी। अब तक अनुसूचित जाति और जनजाति को अवश्य गिना जाता था लेकिन अब शायद अन्य पिछड़ा वर्ग का बढ़ता संख्याबल सरकार को इस निर्णय के लिए मजबूर कर रहा है। विपक्ष जिसकी जितनी आबादी उतनी उसकी भागीदारी का नारा पहले ही बुलंद किये हुए था। ऐसे ही मकसद में सरकार की दिलचस्पी होगी तो फिर इस मासूमियत पर कौन न फ़िदा हो जाए। इसमें कोई शक नहीं कि इस मसले पर देश जिस नेता को लगातार बोलते हुए देख-सुन रहा था वो राहुल गांधी थे । इस हद तक कि लगभ...