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झेलम रो रही है कश्मीरियत के क़त्ल पर

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हां,झेलम अब तक रो रही है, कश्मीरियत के इस क़त्ल पर क्योंकि यही वह नदी है जो कश्मीर की जीवनरेखा है और गवाह है धरती के इस ख़ूबसूरत हिस्से  की भोगी हुई पीड़ाओं की। इसने जाना है कि धरती का स्वर्ग कहलाने के बाद आताताई किस तरह पहले लालची नज़रों से देखते हैं और फिर ख़ूनी वार करते हैं।  इसने देखा है कि शातिरों ने इसके अपने बच्चों के हाथ कैसे बंदूकें थमा दी लेकिन अब इसने चाहा है कि इस बेहद सुन्दर जगह को बहुत बुरी नज़र वालों ने घेर रखा है और अब उनकी शिनाख्त ज़रूरी है।  उस दिन  मंगलवार को झेलम भी ज़ार ज़ार रोई है क्योंकि जिन मासूम बेगुनाहों का खून उसने देखा है, वह उसे भीतर से सुखा दे रहा है। वह नईनवेली दुल्हन जो अपने पति के शव के पास बिलख रही है, झेलम उसके दुःख को झेल पाने में नाकाम है। इसे कश्मीरी आवाम ने भी उसी तरह महसूस किया है और यही वजह है कि ग़मज़दा होकर सड़कों पर हैं ,मशाल लेकर विरोध प्रदर्शन  कर रही है। अपने शहर बंद कर रही है। जम्मू से श्रीनगर तक यही भावना है जैसे अभी चुप रहेंगे तो आगे और बड़े गुनाहों  के भागी होंगे । वह गुहार लगा रही है बंद करो, बंद करो यह ख़ूनी हिंसा बंद ...