सुबह चांदनी मिली
नए साल की पहली सुबह जब आँख खुली तो चांदनी मिली . पूरे चाँद की चांदनी. २००९ के ही चाँद की चांदनी. ज़ाहिर है सूरज की पहली किरण से हम रूबरू नहीं हो सके . ऐसी ही एक सर्द सुबह रणथम्भौर की थी जब शेर के दर्शन को तरसती आँखों के साथ हम कैंटर में सवार हुए .जिन्होंने भी जंगल सफारी का आनंद लिया है वे समझ सकते हैं की जंगल के राजा का दिखना क्या होता है. इस सफारी में हमें एक ऐसा नायाब पक्षी मिला जो आपके सर पर आकर बैठ जाता है.. और जब वह उड़ जाता है तो लगता है सारा अनर्गल हर ले गया. सर्दी में ठिठुरायी पोस्ट १ जनवरी २००९ की डायरी से. आते और जाते साल के संगम के दौरान मानस पर जो अंकित हुआ वही साझा कर रही हूं। रणथम्भौर के एक होटल में डीजे पर सारे गेस्ट थिरक रहे हैं। काळयो कूद पड्यो मेला में .. से लेकर ब्राजील... पर क्या गोरे क्या काले खूब ताल मिला रहे हैं। होटल क्या है पूरा-पूरा बाघालय है। फर्नीचर, क्रॉकरी, चादर, पर्दों पर, यहां तक कि तस्वीरों में भी बाघ ही हैं । इतने बाघ यहां है तो जंगल में क्या आलम होगा। यही सोचकर परिवार खासकर उसमें शामिल बच्चे बेहद उत्सुक थे। 31 दिसंबर की ...