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अब 'सर ' उठाना बहुत भारी है इस सरकार के लिए

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मोदी सरकार के लिए ये समय भीषण संकट का है। चुनाव सुधार के लिए लाई गई प्रक्रिया सर के खिलाफ जो भावनाएं  जनता के भीतर थीं, उसे जैसे यकायक तेज़ स्वर मिल गए हैं। हरेक के दिल का लावा जैसे बह निकला है । अभी कुछ समय पहले जो देश का युवा पूछ रहा था कि जंतर-मंतर पर गोली किसके कहने पर चलाई गई और वही अब पूछ रहा आखिर है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने किसके कहने पर ऐसे गैर क़ानूनी कदम उठाए ? जवाब हैं पर अभी सब गोल-गोल घूम रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ने 48 घंटे के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की चेतावनी दे दी है तो कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को केवल मोहरा कहा है और इसके पीछे के षड्यंत्रकारियों को देशद्रोही क़रार देते हुए जांच की मांग की है। उसने कहा कि साल 2023 में ही इस पद को तमाम अपराधी और दीवानी मुकदमों से जीवनभर की मिली इम्युनिटी के नतीजे सामने हैं । कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को क़ाबिल अफ़सर बताते हुए गवाह बन जाने की सलाह भी दे डाली है ।  यह ज्वालमुखी  इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार रितिका चौपड़ा की बुधवार को प्रकाशित रिपोर्ट  के बाद फटा है। यह रिपोर्ट अब गर्म - गर्म लावा सी...