केवल आइसक्रीम चिप्स मत बेचो चिप बनाओ
वाणिज्य और उद्योमंत्री पीयूष गोयल के भाषण के बाद उपजे बवाल को समझने के लिए शहरों में डिलीवरी सर्विसेस पर एक निगाह डालना ज़रूरी है । कुछ समय से जयपुर के कुछ हिस्सों में रहने वाले खुद को ऐसे नागरिक के रूप में देख रहे हैं जिनके क़दमों में हर चीज़ बस आठ से बीस मिनटों में हाज़िर रहने के लिए आतुर है। 'हुकुम करो आका' की तर्ज़ पर ये डिलीवरी बॉयज़ दौड़ते रहते हैं और हर ज़रूरत का सामान पहुंचा देते हैं। 43 डिग्री की तपती दोपहरी में सड़कों पर कोई नहीं हैं पर ये हैं। इस चाल में महामारी कोविड ने जान फूंकी थी लेकिन अब जो हो रहा है इसमें कीमतों में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है और कई बड़े प्लेयर मैदान में उतर आए हैं। केवल आठ मिनट में ज़रूरी सामान पहुंचाने की होड़ तो दो सालों से है लेकिन अब तो पूरा का पूरा राशन, उसे पकाने के लिए स्टोव, कुकर और इलेक्ट्रॉनिक सामान भी जल्दी पहुंचाने की ज़िद है। जिनके पास धन है, वे फ़ोन में बंद जिन्न को आदेश देते हैं और वह चुटकी बजाते सब हाज़िर कर देता है। हज़ारों स्टार्टअप्स इन अमीरों की ज़रूरतों को पूरा करने में लगे हुए हैं। ऐसा लगता है जैसे चंद शहरी अमीरों की चाकरी में बड़ी तादाद में...