जनता ने बदल दिए अरावली और उन्नाव के फ़ैसले
अच्छी बात है कि अरावली औ र उन्नाव से नए साल पर नई सदा आई है । यह जनता कि सदा है, उसकी आवाज़ है जिसे दबाया जा रहा था। सत्ताधारियों ने तो बलात्कार के दोषी को ज़मानत और अरावली की प्राचीन पहाड़ियों को साफ़ करने की पूरी तैयारी कर ली थी। बलात्कारी को उ स मामले में ज़मानत मिली जहां पीड़िता एक किशोरी थी, जिस पर दबाव बनाने के लिए उसके पिता और वकील की भी हत्या कर दी गई थी और हिमालय से भी प्राचीन पर्वतमाला अरावली को लील जाने के इंतज़ाम भी पूरे थे। हमारी प्राचीन संस्कृति में प्रकृति को मां यानी स्त्री माना गया है लेकिन आज के निज़ाम ने दोनों को ही तकलीफ़ देने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी। कॉर्पोरेट और सियासी सांठ-गांठ यूं तो सालों से अरावली को रौंदता आ रहा है लेकिन अब तो नई परिभाषा कि सौ मीटर से नीचे की पहाड़ी कोई पहाड़ी ही नहीं होगी, देश के बड़े हिस्से में रेगिस्तान को फैलने को खुला न्योता है। इस फैसले ने अरावली के खनन, तोडफ़ोड़ और इसकी गोद में बेशुमार होटल और आरामगाह बनाने के सारे रास्ते खोल दिए, बिना यह विचारे कि यह राजस्थान समेत चार प्रदेशों की जीवन-रेखा है। ये जो दिल्ली कुछ सालों से सा...