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नागरिकता :हम कोई काग़ज़ नहीं मानेंगे

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बीते कुछ सालों से एक विचित्र सिलसिला चल पड़ा है। सत्ता काग़ज़ की बात करती है और जनता अपने काग़ज़ी दस्तावेज़ों को खंगालने लगती है। फिर जनता और सरकार के बीच  हम कागज़ नहीं दिखाएंगे से हम कागज़ ही कागज़ देखेंगे की रस्साकशी चलने लगती है। अब सरकार कहती है हम नागरिकता के लिए किसी भी कागज़  को नहीं मानेंगे, पासपोर्ट को भी नहीं।फ़िलहाल देश में नागरिकता के लिए कोई भी प्रमाण वैध नहीं हैं। कहने को हम भारतीय नागरिक हैं भी और नहीं भी।  ताज़ा बहस और विवाद बीते बुधवार को उस समय पैदा हो गया जब विदेश मंत्रालय ने  पासपोर्ट सेवा दिवस के दिन ही अपने  सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़  के बारे में यह कह दिया कि यह केवल यात्रा के लिए आवश्यक दस्तावेज़ भर है ना कि नागरिकता का कोई प्रमाण। सही है। मान लिया क्योंकि कई देशों में एक से अधिक देशों के पासपोर्ट रखने की रवायत है। जयपुर की एक टेक कंपनी में अपने साथियों से मिलने कभी-कभी माइक  यहां आते हैं। वे ख़ुद आधे फ्रेंच और आधे ब्रिटिश हैं। उनके पास फ्रांस और ब्रिटेन दोनों के ही पासपोर्ट हैं और जिस कंपनी में वे काम करते हैं उसका दफ्तर स्विट...

'साला 'संसद में तमतमाने का सबब क्या है

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आख़िर इस तमतमाने का सबब क्या है? क्यों ये नेता अपने क्रोध पर क़ाबू नहीं कर पाते ? क्यों लोकतंत्र के मंदिर में इनका आवेश चरम पर होता है ? यक़ीनन गृहमंत्री की इस भाव–भंगिमा और तेवर के बाद कि 'आपकी मुनसिफ़ी से नहीं चलेगी  संसद   और मेरे बोलने का क्रम मैं तय करूँगा' ने बता दिया है कि वे दलों के बीच कैसा संबंध रखना चाहते हैं। यह दृश्य जिसने भी देखा वह तकलीफ़ में आ गया कि गृहमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के बीच संवाद किस स्तर तक पहुंच गया है। ये जो आपा खोना है इस पर तो भारतीय प्राचीन ग्रंथ आख्यानों से भरे पड़े हैं। एक से एक बेहतरीन उदाहरण हैं  मनसा,वाचा, कर्मणा को क़ाबू में रखने के लिए। गीता में तो बहुत स्पष्ट है कि बुद्धिमान व्यक्ति का मन, शब्द और कर्म पर नियंत्रण बहुत ज़रूरी है। अनदेखा तो नेता प्रतिपक्ष को भी नहीं किया जा सकता क्योंकि संवाद जो संयम की सीमा-रेखा लांघ गया, उसके दूसरे छोर पर वे थे।  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तो लगातार चुनाव जीतने वाली, सबसे बड़ी पार्टी के सशक्त नेता हैं फिर क्यों उनका ग़ुस्सा सतह पर आ गया। नेता प्रतिपक्ष लगातार चुनाव हार रहे हैं ,उनके पास ढेरों सवाल हैं...

नोटबंदी, देशबंदी के बाद अब वोटबंदी

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नोटबंदी, देशबंदी के बाद अब वोटबंदी का दौर है। सरकार के इन फ़ैसलों को लाभ-हानि के तराज़ू में तौलने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी और गंभीर पक्ष है आम आदमी की जान जाने का क्रम। नवंबर 2016 में यकायक लागू हुई नोटेबंदी ने पूरे देश को कतार में लगा दिया था । परिवारों  के इलाज, ब्याह-शादी के कार्यक्रम अस्त-व्यस्त हुए। सैकड़ों लोग इस अभाव और तनाव में अपनी जान खो बैठे। मार्च 2020 की एक रात देश की गति को अचानक रोक दिया गया। लॉकडाउन घोषित हो गया, जो जहां था वहीं, थम गया। जिसके पास थमने के लिए जगह नहीं थी, वह पैदल ही अपने घर के लिए निकल पड़ा।अव्यवस्था के अस्पतालों में मरीज़ दम तोड़ रहे थे तो सड़कों पर जनता। अब वोटबंदी लागू हुई है कि जल्द से जल्द जनता 2002 की मतदाता सूची के हिसाब से अपने मतदाता होने का सबूत सरकार को दे वर्ना नाम कट जाएगा। सरकार को अपने ही तंत्र से बनी वोटर आईडी पर शक हो गया है इसलिए देश के बारह राज्य अब इसी काम में लगे हुए हैं। इस काम को पूरा करने के लिए सबसे छोटी इकाई बीएलओ है जिन पर काम का ऐसा दबाव है कि वे आत्महत्या कर रहे हैं और जो नागरिक यह साबित नहीं कर पा  रहे हैं, वे भी  ख़ुद को...

बिहार :आख़िर क्यों है संदेह 'सर' पर

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और क्यों बिहार में चुनाव आयोग को अपने ही पहचान पत्र वोटर आईडी पर शक़ है  बीते कुछ समय से देश के नागरिकों पर ही यह साबित करने का दारोमदार डाल दिया गया है कि वे इस देश के नागरिक हैं। ऐसा लगभग धमकाने की मुद्रा में है कि जो ऐसा नहीं कर पाए तो व्यवस्था आपको बाहर कर देगी। कागज़ दिखाने की ऐसी ज़ोर-ज़बरदस्ती पहले कभी नहीं देखी गई। अब नया यह कि जो काग़ज़ हैं भी तो ये पहचान के लिए काफ़ी नहीं हैं। वोटर आईडी, राशन कार्ड, यहां तक कि आधार कार्ड भी कोई मायने नहीं रखता। अब नई मतदाता सूची बनेगी  और उसमें आप हो तब ही वोट डाल सकोगे। जो आवाज़ ऊंची की तो फिर घुसपैठिये का तमगा पक्का है।बिहार में बीते तीन सप्ताह से ऐसी ही क़वायद चल रही है और 'सर' जी इस बड़े अभियान में लगे हुए हैं। अब सवाल यही है कि क्या चुनाव आयोग नया गृह मंत्रालय है जो नागरिकता के प्रमाणपत्र  भी बांटेगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि आयोग इन पहचान पत्रों को शामिल करे, अब यह आयोग की ज़िम्मेदारी है कि वह नागरिकों को विश्वास में ले कि यह उन्हें शामिल करने के लिए हो रहा है दूर करने के लिए नहीं। विपक्ष तो कुछ दिनों से लगातार चीख़ ही रहा है...