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वक़्फ़ ने किया क्या नया सितम ..

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मधुर गीत के बोल  वक़्त ने किया क्या हंसी सितम . . के साथ छेड़ छाड़ के लिए माफ़ी के साथ यह शीर्षक लिखा है। गीत जिसे कैफ़ी आज़मी साहब ने  लिखा और गीता दत्त ने  गाया था। दरअसल  वक़्फ़  ( संशोधन)  अधिनियम, 2025 ने अजब सितम यह किया है कि संसदीय शक्ति और न्यायिक शक्ति के बीच जारी टसल को और तेज कर दिया है। हाल ही में कुछ ऐसे फैसले और टिप्पणियां आई हैं  कि सरकार को यह लगने लगा है कि सर्वोच्च न्यायालय अपनी लक्ष्मण रेखा लांघ रहा है तभी तो पहले किरन रिजिजू और फिर शुक्रवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने कह दिया कि  अदालतें राष्ट्रपति को आदेश नहीं दे सकतीं। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 142 के तहत कोर्ट को मिला विशेष अधिकार लोकतांत्रिक शक्तियों के ख़िलाफ़ 24 घंटे उपलब्ध न्यूक्लियर मिसाइल बन गया है। जज सुपर पार्लियामेंट की तरह काम कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि सर्वोच्च  कौन  है न्याययालय या संसद।  वक़्फ़  ( संशोधन) बिल पर सुनवाई के दौरान तीन न्यायाधीशों की पीठ ने भले ही कोई स्टे नहीं दिया है लेकिन अगली सुनवाई तक तत्काल  कुछ बातों पर रोक लगा दी ...

विश्वास क्यों बदल गया अविश्वास में

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समय-समय पर सरकार के प्रवक्ता बतौर दिए गए उनके भाषण और त माम विवादों के बीच जया बच्चन और ममता बैनर्जी के साथ हुए उनके तल्ख़ संवाद भी सभापति महोदय के स्वाभाव की ओर इशारा करते हैं  आज़ाद भारत  के संसदीय इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी सभापति के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ जो उच्च सदन राज्यसभा के सभापति भी हैं ,विपक्ष ने उनके विरुद्ध  अविश्वास प्रस्ताव  लाकर पद से हटाने की तैयारी कर दी है। ऐसा तब है जब विपक्ष के पास कोई बहुमत नहीं है और तटस्थ सियासी दलों ने कह दिया है कि उनसे किसी भी तरह के  कोई समर्थन की मांग नहीं की गई है।गणित विपक्ष के पक्ष में नहीं है फिर क्या है जो विपक्ष को ऐसा करने के लिए मजबूर कर रहा है ? बीच-बीच में बिखरने का संकेत देने वाला इंडिया गठबंधन यहां एक है और उसका एक स्वर में आरोप है कि संसद में उपराष्ट्रपति का व्यवहार पक्षपातपूर्ण है और यह व्यवहार नियमों को छोड़ राजनीति की बात करता है। संविधान के अनुच्छेद 67 के तहत यह पहली बार है कि उपराष्ट्रपति के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया जा रहा है। ऐसे में वे कोई दि...