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आलू लो पूरी लो, इन मर्दों से दूरी लो

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कभी-कभी नारे वह काम कर जाते हैं जो गहरे  विमर्श ,कानूनी बहस और बड़े बजट भी नहीं कर पाते। महिलाओं की सुरक्षा,सार्वजनिक स्थानों पर उनकी मौजूदगी बनाए रखने के लिए यही सब हमेशा होता है लेकिन बावजूद अपराध, छेड़छाड़,हिंसा और बलात्कार में कोई कमी नहीं आती। भारत का हर शहर बस एक-सी दास्तान सुनाता है और देश की राजधानी तो जैसे महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों की भी राजधानी है। हर साल दो हज़ार से ज़्यादा बलात्कार के मामले यहां दर्ज  होते हैं। साल 2012 का निर्भया सामूहिक बलात्कार मामला हो या पिछले हफ़्ते  दिल्ली के आस्थाकुंज में 17 साल की लड़की  के साथ  खुद को पुलिसवाला बता कर हुआ सामूहिक बलात्कार।  तब से अब तक देश की राजधानी में  26  हज़ार 500 रेप की घटनाएं हो चुकी हैं।  बिहार के जमुई ज़िले में एक माइनर के साथ बदसलूकी और यौन दुराचार हुआ। दिल्ली में एक के बाद एक हुए विरोध प्रदर्शन  बता रहे हैं कि छात्राओं ने जैसे कमर कस ली है। अबकी बार जो तख्तियां उन्होंने हाथ में उठाई है,वे गहरी चोट करती हैं।  रसोई से चली ये नारे इतने तीखे हैं कि पानी पीकर भी सही नहीं ...