इस छोरी में आग है?
हरियाणा की इस छोरी का चर्चा पूरी दुनिया में है। पेरिस ओलंपिक्स का मैडल इस छोरी से गले लगते-लगते वह रह गया। कोई यह भी नहीं कह पाया कि इसकी चूक थी, वज़न नहीं बढ़ना चाहिए था। उसके साथ हमदर्दी का समंदर था। प्रधानमंत्री को कहना पड़ा कि देश तुम्हें पदक विजेता ही मानता है। गलत तो कोई तब भी नहीं कह पाया जब इसने एक बाहुबली नेता से पंगा लिया। पंगा क्या था, एक नेता की अय्याशी और मनमर्ज़ी से परदा उठाने का संघर्ष था लेकिन फिर इस परदे को ऐसा तान दिया गया कि वह खिंचा ही नहीं। उसने और उसके साथियों ने पुलिस के डंडे खाए। यह तो हाल करते हैं हम उनका जो देश का झंडा बुलंद करने के सपने के साथ जीते-मरते हैं। पदक लाने पर तस्वीरें खिंचवाते हैं और जब न्याय मांगते हैं तब खदेड़ देते हैं। अब इस छोरी ने एक नया मंच चुन लिया है। कुश्ती का दंगल छोड़ सियासत के दंगल में कूद गई है। लड़ाकू और साहसी लड़की विनेश फोगाट (30 )अब कांग्रेस की नेता हो गई हैं और विधायक का चुनाव लड़ने जा रही हैं। जीत के कितने आसार हैं उनके और उनकी पार्टी के, यह जानने से पहले कुछ उस आग के बारे में जान लेते हैं जिसका ज़िक्र रसूल हमज़ातोव ने अपनी किताब...