संदेश

indian army लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हिंद की सेना का जवाब कि हां तुम एक विफल राष्ट्र हो

चित्र
पाकिस्तान एक विफल देश है क्योंकि इसका जन्म ही नफ़रत की बुनियाद पर हुआ है। अंग्रजों से आज़ाद होते ही भारत का बंटवारा हुआ और मानवता ने जिस वीभत्स मंज़र को देखा,उसकी मिसाल कम मिलती हैं। कई कलाकार, लेखक और पॉलिटिशियन मज़हब के आधार पर बंटे पाकिस्तान  में चले तो गए लेकिन उम्र भर सिर्फ हिंदुस्तान को ही याद करते रहे, अपने दोस्तों से मिलने के लिए तड़पते रहे जैसे उन्हें यह अहसास हो गया था कि ग़लती हो चुकी है और समय का पहिया अब पीछे नहीं खींचा जा सकता। जो लिख सकते थे, उनके शब्दों में यह दर्द बयां हुआ और बा क़ी अपने दिलों में इस टीस के साथ ज़िंदा रहे। मशहूर और बेहतरीन कहानीकार सआदत हसन 'मंटो' (दो दिन बाद उनकी सालगिरह है) उन्हीं में से एक थे। उन्होंने विभाजन के समय हुए दंगों की त्रासदी को भीतर तक उतारा और फिर पन्नों पर। 'टोबा टेकसिंह' और 'खोल दो' उनकी ऐसी ही महान रचनाएं हैं। मंटो दोस्तों को अक्सर लिखा करते थे कि यार मुझे वापस बुला लो। उन्होंने ख़ुदकुशी की नाकाम कोशिश भी की थी। वे बहुत कम (43) उम्र जी पाए जैसे चिंता और जीवन का कोई गहरा रिश्ता हो। यूं तो मंटो के बारे में कहने को इ...

कमंडल को चाहिए मंडल का टेका

चित्र
अब तक कमंडल से अपनी राजनीति को चमकाने वालों को अचानक मंडल की याद आ गई है, वह भी तब जब देश पहलगाम आतंकी हमले के बाद सरकार से बड़े एक्शन की उम्मीद कर रहा था। मुख्य धारा के मीडिया ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ऐसा माहौल तैयार कर दिया था कि लगने लगा था कि सरकार घर में घुसकर मारने की नीति टाइप किसी कदम का खुलासा देशवासियों से करेगी। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति ने आगामी जनगणना के साथ जाति की गिनती कराने का फ़ैसला कर लिया। आज़ादी के बाद पहली बार देश के नागरिकों से उनकी जाति पूछी जाएगी। अब तक अनुसूचित जाति और जनजाति को अवश्य गिना जाता था लेकिन अब शायद अन्य पिछड़ा वर्ग का बढ़ता संख्याबल  सरकार को इस निर्णय के लिए मजबूर कर रहा है। विपक्ष जिसकी जितनी आबादी उतनी उसकी भागीदारी का नारा पहले ही बुलंद किये हुए था। ऐसे ही मकसद  में सरकार की दिलचस्पी होगी तो फिर इस मासूमियत पर कौन न फ़िदा हो जाए। इसमें कोई शक नहीं कि इस मसले पर देश जिस नेता को लगातार बोलते हुए देख-सुन रहा था वो राहुल गांधी थे । इस हद तक कि लगभ...