'नीट' नशे में है सिस्टम
ये जो इन दिनों परीक्षाओं के पर्चे लीक हो रहे हैं, ये पर्चे नहीं बल्कि रक्त है देश के युवाओं का जो बीते कुछ सालों से लगातार लीक हो रहा है। इस रिसाव के साथ जो भरोसा और आस्था व्यवस्था से डिग रही है, वह भविष्य के संकट के ख़तरनाक संकेत हैं। इस लीक और फिर परीक्षा के रद्द होने के बाद दो छात्रों ने आत्महत्या कर ली है। ये पढ़ने -लिखने वाले बच्चे हैं इसलिए इनका रुदन, चीत्कार सड़कों पर नहीं है। यह ऐसा है जैसे किसी ने जानबूझ कर इनके ख़िलाफ़ कोई साज़िश रची हो। कल्पना कीजिये कि व्यवस्था से इस तरह ठगा हुआ, धोखेबाज़ी का शिकार छात्र जब समाज में दाख़िल होगा, तब वह कैसे एक मज़बूत और आत्मविश्वासी नागरिक का प्रतिनिधि होगा? नीट ही नहीं बल्कि अधिकांश सरकारी भर्ती परीक्षाएं कभी भी रद्द हो जाती हैं और कभी नतीजे देने में ही लम्बा वक्त लगा देती हैं । इंतज़ार में उम्र निकल जाती है और युवा निराश। आज भले ही युवा शक्ति पर देश इठलाता हो,आगे लाख ढूंढने पर भी समझ नहीं आएगा कि आखिर ग़लती कहां हो गई ? बेहतर होता नीट परीक्षा को जल्दबाज़ी में रद्द करने की बजाय पहले जांच होती क्योंकि गंभीर गड़बड़ियां ...