बूढ़े युद्ध शुरू करते हैं और जवान शहीद
" बूढ़े युद्ध शुरू करते हैं और जवान इसमें लड़ते और जान देते हैं" -हर्बर्ट हुवर पश्चिमी एशिया में युद्ध की लपटें भयावह हो गई हैं। एक ऐसा युद्ध जिसमें चुन-चुन के हत्याएं भी हो रही हैं, तेल और गैस के मुहानों पर सीधे हमले हो रहे हैं, ग़रीब देश और गहरी तकलीफ़ में आ गए हैं। हैरानी और दुःख की बात यह है कि शांति के प्रयास बिल्कुल सिफर हैं। सहायता पहुंचाने के लिए जहाज़ तैयार हैं लेकिन अमन की बात पर मौन है। इस कबीलाई दुनिया में कोई एक भी नेता नहीं बचा है जो तेल के लिए जारी इस जंग में जनता के तेल निकलने की स्थिति को समझ सके,बोल सके। महावीर, बुद्ध,नानक और गांधी का देश भी आते हुए ताबूत देख रहा है लेकिन शांति को लेकर दुविधा में है। यही इस दौर की कूटनीति है कि जिनके पास लाठियां हैं उनके हो जाएं,गुटबाज़ी करें। मोटे तौर पर भले ही ईरान-इजराइल+अमेरिका सीधे लड़ाई में हों लेकिन शेष दुनिया कभी सीधे तो कभी आजू -बाजु से इसके ख़तरनाक नतीजों की चपेट में आ रही है। हमारा देश न किसी के लेने में है और न किसी के देने में, फिर भी युद्ध के असर में आता जा रहा है। असर ऐसा कि एक मार्च को ओ...