'पापा भाग गए' के साथ लौटते हैं कई सवाल
किसी भी नाटक का पहला शो नाटक के साथ उस उत्तेजना, उहापोह और डर को भी दिखा जाता है जो नाटक के पात्र और निर्देशक उस पल में जी रहे होते हैं। पापा भाग गए का पहला शो जब जयपुर के जवाहर कला केंद्र में मंचित हुआ, तब ऐसे ही भाव सब के चेहरे पर थे जो धीरे-धीरे नाटक के किरदारों और फिर उनके सशक्त भावों में ढलते चले गए। पापा एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति हैं जो दोनों बच्चों का ब्याह कर चुके हैं और अपनी ज़िन्दगी को व्यस्त रखने की कोशिश में लगे हुए हैं क्योंकि पत्नी की मौत सब्ज़ी-मंडी में सांड के उत्पात में हो चुकी है। दस साल तक पापा ने कोमा में रही पत्नी की देखभाल की लेकिन अब वे अकेले हैं। इस अकेलेपन के बीच जब बच्चों को पापा के भागने की सूचना मिलती है तो वे अवाक रह जाते हैं। घर में तूफ़ान मचता है कि आख़िर इस उम्र में पापा को भागने की क्या सूझी और कौन हैं ये मिस आलू वाली यानी मिस अहलूवालिया जो हमारे सीधे-सादे पापा पर डोरे डाल रही हैं। दोनों बच्चे जो भले ही अपनी पसंद से शादी कर चुके हैं लेकिन पापा के किसी के साथ होने की बात से वे भी उसी पारंपरिक सोच पर चलने लगते हैं कि हाय इस उम...