वेनेजुएला विश्व सुंदरियों के देश से हरण
ये जो छापा डालकर अमेरिका के राष्ट्रपति ने वेनेजुएला के राष्ट्राध्यक्ष और उनकी पत्नी का हरण किया है, हमारे यहां तो इसे रामायण काल से ही बड़ा अपराध कहा जाता रहा है। रावण ने यही तो किया था। क्या हश्र हुआ उसका। उस हश्र से भी बड़ी जो बात है कि ऐसे अंत वाले महाग्रंथ का असर दुनिया के बड़े हिस्से पर हुआ। ज़ाहिर है दुनिया अन्याय करने वाले का अंत ही देखना चाहती है। कथा में बेशक शूर्पणखा की नाक काटने को भी एक कारण बताया गया है और शायद ऐसी घटनाएं अमेरिका-वेनेजुएला के रिश्तों में भी होंगी लेकिन पाठक को आनंद और तसल्ली तो रावण के अंत में ही मिली। वह सहस्राब्दियों से आज तक रावण के पुतले जला रहा है। किसी देश के सर्वोच्च नेता को बीवी समेत उठवा लेना मनमौजी अमेरिकी नेतृत्व की नई घृणित हरकत है। वेनेज़ुएलावासी मानते हैं कि निकोलस मादुरो अगर ताकत हैं तो उनकी पत्नी सिलिआ फ्लोरेस व्यवस्था का दिमाग। यूं दोनों के मिलने की कहानी भी दिलचस्प है।
अमेरिका ने इस हरण के तुरंत बाद एक और लैटिन अमेरिकी देश कोलंबिया को हिलाने और दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड को ख़रीदने के इरादे पक्के तौर पर ज़ाहिर कर दिए हैं। ट्रंप कह रहे हैं कि शांति से ग्रीनलैंड हमें बेच दो, नहीं तो सेना उसे छीन लेगी। कनाडा को अपना 51 वां राज्य बनाने की मंशा वे पहले ही ज़ाहिर कर चुके हैं। बीच-बीच में वे भारत समेत कुछ देशों को हड़काते रहते हैं कि आपने मुझे ख़ुश नहीं किया और रूस से तेल ख़रीदना बंद नहीं किया तो अच्छा नहीं होगा। भारत आने वाले अमरीकी राजदूत ने रूस से तेल ख़रीदने के जुर्म में पांच सौ फ़ीसदी टैरिफ़ की बात कह ही दी है। उधर वेनेजुएला की जनता सड़कों पर है और कह रही है कि हमें हमारा राष्ट्रपति लौटाओ,उसे हमने चुना है। हमें अमेरिका की कॉलोनी बनना मंज़ूर नहीं , चाहे हमारी जान ही क्यों न चली जाए। वे कह रहे हैं हम शोक में हैं उनका दोष क्या था जो सो रहे थे और मार दिए गए। हमारे लिए यह सात दिन का नहीं महीनों का शोक है।
हम भोले-भाले भारतीय तो ख़ुद अपने ही देश के भीतर चल रही नए टाइप की गुत्थियों में इस क़दर उलझे हैं कि वेनेजुएला को केवल सबसे ज़्यादा विश्वसुंदारियों वाले देश बतौर ही पहचानते थे। अगर हमारी सुंदरी दूसरे स्थान पर रही है तो बाज़ी ज़रूर वेनेजुएलन ने ही मारी होगी। दुनिया में सबसे ज़्यादा सात मिस यूनिवर्स और छह मिस वर्ल्ड इसी देश से आती हैं। भारत के पास भी तीन मिस यूनिवर्स और छह मिस वर्ल्ड के ख़िताब हैं। अब जब अचानक ये देश ट्रंप के अंगूठे के नीचे आ गया तो लोगों को फिर एहसास हुआ कि ये नेता तो किसी भी हद को मानता ही नहीं। अमेरिका ने अपनी अर्थव्यवस्था के लिए वेनेजुएला के तेल भंडार (दुनिया के 18 प्रतिशत) कब्ज़ा लिए हैं और ज्यों ही रूस-चीन के तेल टैंकर भरे जहाज उसे समंदर में नज़र आते हैं,उसे भी अवैध बता कर धर लेता है। हमला और हरण बेशक नशीली ड्रग्स भेजने के आरोप में किया हो लेकिन कब्ज़ा तेल पर ही जमाया। दुनिया इस धूर्तता को समझ रही है लेकिन जैसे बेचारी भी लग रही है। वरिष्ठ साहित्यकार रति सक्सेना कहती है –"मैं 2023 में मादुरों से मिली थी, हम world Poetry Movement पर पाँच सदस्य उनके टी वी शो देखने गए थे। वे लगातार दो घंटे खड़े हो कर बिना किसी कागज पत्री के संवाद करते रहे। पानी तक नहीं पिया। रुके भी नहीं। यह टी वी शो चावेज के वक्त शुरु हुआ था, जिसमें प्रेसीडेन्ट जनता की गतिविधियों से जुड़ते है। हालांकि उस वक्त भी उनकी जान को खतरा था। दक्षिण अमेरिका को नष्ट करने में अमेरिका की प्रमुख भूमिका रही है।"
अचानक ही उन देशों ने शुक्र मनाना शुरू कर दिया है जिनके पास तेल नहीं है। समझौता कर लो तो ज़िंदा रहोगे वर्ना इराक, सीरिया होने में देर नहीं लगेगी। अफ़ग़ानिस्तान और लीबिया भी। कोलम्बिया ने जब इस हरकत को अपहरण कहा तो उसे भी धमकी दे दी गई थी लेकिन विरोध के लिए जनता सड़कों पर आ गई। तब अचानक अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति गुस्ताव पेट्रो से एक घंटे तक फ़ोन पर बात की और वाइट हाउस आने का न्योता दिया। वेनेजुएला शिकार हो चुका है क्योंकि वह अपने तेल का निर्यात डॉलर में ना कर चीनी मुद्रा युआन में कर रहा था। तानाशाही, विस्तारवादी रवैया,मानव अधिकारों का हनन डोनाल्ड ट्रंप के लिए बेकार की बातें हैं असली और आख़िरी खेल केवल तेल का है जिसके लिए राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी सिलिआ फ्लोरेस भी उठवा ली गईं ।
सिलिआ फ्लोरेस और निकोलस मादुरो की मुलाकात उस दौर में हुई जब वे क्रन्तिकारी नेता ह्यूगो चावेज़ के केस के सिलसिले में साथ आए। वेनेजुएला की तब की सरकार ने इस सैनिक क्रन्तिकारी को जेल में डाल दिया था। सिलिआ वकील हैं और श्रम और मानव अधिकार कानून की जानकार। तब निकोलस यूनियन के सक्रिय कार्यकर्ता और बस चालक थे। सिलिआ उनसे छह साल बड़ी हैं। लम्बे संघर्ष के बाद चावेज़ मुक्त हुए और 56 फ़ीसदी वोट के साथ 1998 में राष्ट्रपति चुने गए। ऐसा लगातार चार बार हुआ। चावेज़ ने अपने शासन में ही अमरीकी दादागिरी से मुक्ति के निर्णय लेने शुरू कर दिए थे। उन्होंने तेल पर वेनेजुएला का नियंत्रण मज़बूत किया। ऊके कार्यकाल में सिलिआ और निकोलस को महत्वपूर्ण पद मिले और 2013 में चावेज़ (58 ) के कैंसर के निधन के बाद ये दोनों सत्ता में आए। आज 10 जनवरी को ही चावेज़ का निधन हुआ था। सिलिआ पर इलज़ाम लगे कि उन्होंने जम कर भाई-भतीजावाद किया। सिलिआ ज़्यादा सामने नहीं आती थीं। चेहरा निकोलस मादुरो का और चेहरे के पीछे के दिमाग सिलिआ का और बीते शनिवार दोनों को उठवा लिया गया।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सभ्यता की ओर बढ़ी दुनिया फिर से जंगल राज और तानशाही दौर की ओर चल पड़ी है। जिसकी लाठी उसकी भैंस तो है ही, ये ख़ून ख़राबे से भी ग़ुरेज़ नहीं कर रहे हैं। सत्तर से भी ज़्यादा लोग इस दबिश में मारे गए जिसमें क्यूबा के 32 कर्नल, लेफ्टिनेंट और मेजर शामिल थे। कई निर्दोष नागरिक नींद में मार दिए गए, जिनके सम्मान में देश ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया है।अब इजराइल के ग़ज़ा पर, रूस के यूक्रेन पर,चीन के ताईवान पर बोलने वाले अमेरिका के हाथ और गंभीर अपराध से रंग गए हैं। सनद रहे कि अब ख़तरा उन मुल्कों पर ज़्यादा है जो अमरीका की डंडापटेली के हिसाब से नहीं चल रहे और अपने देश को भी जवाब नहीं दे पा रहे हैं। हमने तो अतीत में भी कभी घुटने नहीं टेके और अब भी देश का स्वाभिमान डिगना नहीं चाहिए। उम्मीद है हमारी कूटनीति की कमान काबिल हाथों में है। 'प्रिंट डॉलर क्रिएट वॉर' की इस सियासत पर विदेश मंत्री जयशंकर प्रसाद कहते हैं-"ऑपरेशन सिंदूर के समय आपने हम पर अंगुली उठाई थी और अब आप जो कर रहे हैं उससे दुनिया किस कदर चिंतित है इसकी परवाह आप नहीं करते। आप अपने क्षेत्र में क्यों नहीं देखते ? अपने से सवाल क्यों नहीं पूछते कि वहां कितनी हिंसा हुई ? "बात सच है अमेरिकी जनता के इस नुमाइंदे ने अलग ही दुनिया गढ़ने का मंसूबा बना लिया है। दुनिया के क़ाबिल और शांतिप्रिय लोगों को एक होना होगा। ज़िंदा और संवेदनशील कौमों को तीसरे युद्ध का इंतज़ार नहीं करना चाहिए।



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