चला रहा है निजाम ए हस्ती...वो ही खुदा है
ॐ जय जगदीश अल्लाह ओ अकबर बोले सो निहाल सत् श्री अकाल जय यीशु यह महज शब्द नहीं बल्कि उस परम पिता परमेश्वर का जय घोष है जो दुनिया के निजाम को चला रहा है। यह दिन-रात जोर-जोर से दोहराने, पुकारने का नाम भी नहीं है। यह हर हाल में अपने मानस को तनाव से मुक्त रखने के लिए है। क्या हम पूछ सकते हैं कि आज के माता-पिता अपने बच्चों में इसे रोपने का दायित्व कितना निभा पा रहे हैं ? कल ही की बात है। नन्हा मोनू दरवाजे से टकराकर गिर गया और जोर-जोर से रोने लगा। घबराई मां दौड़कर रसोई से बाहर आई और मोनू को गोद में उठा पुचकारने लगी। मोनू का रोना कम नहीं हुआ। मां ने एक जोरदार प्रहार दरवाजे पर किया और कहा देख दरवाजे की पिटाई हो गई अब वह रो रहा है। दरवाजे को पिटते देख मोनू चुप हो गया। मोनू की मां अकसर कभी दरवाजे को पीटकर तो कभी जमीन पर धप लगाकर मोनू के लिए झूठ-मूठ की चीटियां मरवाती रहती हं उस दिन साहिल भी स्कूल से चोट लगवाकर आया। हाथ पर घाव था और पट्टी बंधी हुई थी। मां से बेटे का दुख देखा ना गया। चल पड़ी स्कूल राहुल को ढूंढ़ने क्योंकि साहिल ने यही बताया था कि राहुल ने उसे धक्का दिया। दरअसल, यह बहुत ही सेडिस्ट ...