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सॉफ्ट टार्गेट

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shaheen and her friend faced the charges for writing on facebook rimsha maseeh: pakistani girl facing blassfemy charges पकिस्तान में चौदह साल की किशोरी रिमशा मसीह को ईशनिंदा के इलज़ाम  में घेर लिया जाता है    तो भारत में दो लड़कियां  केवल इसलिए गिरफ्तार कर ली जाती हैं क्योंकि  उन्हें भारत की आर्थिक           राजधानी की रफ़्तार के       ठहरने पर एतराज़       था आखिर क्यों ढूंढे      जाते हैं सॉफ्ट टार्गेट   . . . द रसल हमारा तंत्र आसान टार्गेट ढूंढ़ता है। पाकिस्तान में एक किशोरी ईशनिंदा कानून से लड़ाई लड़ रही है, तो हमारे यहां मुम्बई में दो लड़कियों को इसलिए पकड़ लिया गया,क्योंकि उन्होंने बाल ठाकरे की मृत्यु पर मुम्बई बंद के दौरान हो रही परेशानियों का जिक्र फेसबुक पर कर दिया था। उन्हें अरेस्ट किया गया और बाद में जमानत पर छोड़ा गया। उनका कुसूर था कि उन्होंने खुद को अभिव्यक्त  किया था। एक ने लिखा और दूसरी ने उसके ...

बेवा तारीख़

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  एक डूबी तन्हा तारीख है आज कभी महकते थे फूल इस दिन चिराग भी होते थे रोशन यहाँ खुशबू भी डेरा डाले रहती थी तुम नहीं समझोगे  तारीख का डूबना क्या होता है नज़रों के सामने ही यह ऐसे ख़ुदकुशी करती  है   कोई हाथ भी नहीं दे पाता हैरां हूँ एक मुकम्मल तारीख यूं ओंधे मुंह पड़ी है मेरे सामने खामोश और तन्हा. मैंने देखा है एक जोड़ीदार तारीख को बेवा होते फिर भी मैं उदास नहीं मेरे यार न ही नमी है आँखों में इसी तारीख में जागते हैं बेसबब इरादे बेसुध लम्हें बेहिसाब बोसे बेखुद साँसें बेशुमार नेमतों से घिरी है यह तारीख...

वहां तालिबान, यहाँ बयान

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brave girl: ham sab malala hain पडोसी मुल्क में जहाँ पढना चाहने वाली किशोरी मलाला पर गोली दागी जा रही वहीँ हमारे मुल्क बयानों के बाण गहरे घाव कर रहे हैं. इ न शब्दों को लिखते हुए स्वर प्रार्थना में डूबे हुए हैं। पंद्रह साल की मलाला युसुफजई के लिए इसके सिवाय किया भी क्या जा सकता है। महज स्कूल जाते रहने की जिद एक बच्ची को मौत देने का कारण कैसे बन सकती है। नौ अक्टूबर को मलाला के सर में उस वक्त गोली मारी गई जब वह परीक्षा देकर बस से घर लौट रही थी। दो अज्ञात व्यक्ति नकाब ओढे़ बस में चढ़े और पूछा कि तुममें से मलाला कौन है। मलाला के गोली लगते ही बस के फर्श पर खून फैल गया। हमले में उसकी दो सहेलियां भी घायल हो गईं। शाजिया को गोली उसके कंधे पर लगी। इस दर्दनाक मंजर की दास्तान दोहराते हुए मलाला की दोस्त शाजिया की  में कोई खौफ नहीं तैरता। वह कहती है, मलाला ठीक हो जाएगी और हम फिर स्कूल जाएंगे। मलाला को पता था कि उसके साथ यह हादसा हो सकता है। उसे लगातार धमकियां भी मिल रही थीं, लेकिन एक दिन भी वह स्कूल जाने से नहीं कतराई। पाकिस्तान की स्वात घाटी बेहद खूबसूरत है, लेकिन गोरे, सुर्ख...

पुष्कर के फूल

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कुदरत की गोद में बसा पुष्कर प्रथ्विवासियों के लिए बेहतरीन उपहार है लेकिन यहाँ  के कथित पुजारी इस सौंदर्य को नष्ट कर रहे हैं वह भी एक फूल देकर . आप सोच रहे होंगे की फूल ने कभी किसी का  क्या बिगाड़ा है लेकिन ये फूल इन दिनों सैलानियों को डराने का काम कर रहे हैं     ब्रह्मा जी के एकमात्र प्राचीन मंदिर के अलावा पुष्कर में कुछ ऐसा है जो आध्यात्मिक स्तर पर इनसान को बांधने की क्षमता रखता है। पहाड़ों की आभा, मंदिर के घंटों का नाद और घाट पर आस्था में डूबे लोग। यहां हरेक के लिए कुछ न कुछ है। लेकिन कुछ ऐसा भी है जो तकलीफ देता है। ब्रह्मा जी के मंदिर से घाट तक जाते हुए एक सैलानी जोड़ा भी हमारे साथ हो लिया। शायद उन्हें लगा था कि हमारे साथ रहते हुए वे धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाए बिना दर्शन कर सकते हैं। वे हर बार हमसे पूछते कि  क्या  हम  भीतर जा सकते हैं, क्या यहां जूते उतारने होंगे,   यहां झुककर प्रणाम करना होगा।   तमाम जिज्ञासाएं वे हमारे साथ साझा करते हुए चल रहे थे । वे स्पेन से आए थे। बार्सिलोना से। हमने स्पेन की राजधानी का नाम लिया, ...

रिश्ता अब फ़रिश्ता सा है

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रिश्ता अब फ़रिश्ता सा है बहुत करीब बैठे भी बेगाने से  हैं एक  पीली चादर बात करती हुई सी है बाल्टी का रंग भी  बोल पड़ता है कई बार वह बांस की टूटी ट्रे भी  सहेजी हुई  है  बाबा की पेंटिंग तो रोज़ ही रास्ता रोक लेती है   उन खतों के मुंह सीले हुए से  हैं वह ब्रश, वह साबुन, सब बात करते हैं किसी  के खामोश होने से कितनी चीज़ें बोलती हैं मुसलसल मैं भी बोलना चाहती हूँ तुमसे इतना कि हलक सूख जाए और ये सारी बोलियाँ थम जाए मेरी इनमें कोई दिलचस्पी नहीं तुम बोलो या फिर मुझसे ले लो इन आवाज़ों को समझने का फ़न.

तुम्हारे बाजू में

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तुम नहीं थे तुम थे तुम नहीं हो  तुम हो तुम्हारे होने या न होने के बीच मैं कहाँ हूँ ठीक वहीँ, जहाँ तुम हो तुम्हारे बाजू में   . मैंने तुम्हें न खोया न पाया न लिबास के रंग बदले इस आने - जाने पर न धातुएं ओढ़ी  न माथा  ही रंगा फिर ये किस रंग  में रंगी हूँ मैं? तेरा है ये  रंग तेरी रूह  पैबस्त है  मेरे भीतर ...और रूह कहीं नहीं आती-जाती जिस्म आते -जाते हैं |

हिंदी में ही करता है साइकल का पहिया पानी की कुल्लियां

 हिदी दिवस पर भी देरी का शिकार है मेरी यह पोस्ट ,उम्मीद है यह आपके कीमती समय का शिकार नहीं करेगी वैसे , कोई इरादा नहीं है कि हिंदी ही बोलने पर जोर दिया जाए या फिर अंग्रेजी की आलोचना की जाए। हिंदी बेहद काबिल और घोर वैज्ञानिक भाषा है जो खुद को समय के साथ कहीं भी ले चलने में सक्षम है। क से लेकर ड तक बोलकर देखिए तालू के एक खास हिस्से पर ही जोर होगा। च से ण तक जीभ हल्के-हल्के ऊपरी दांतों के नीचे से सरकती जाएगी और व्यंजन बदलते जाएंगे। ट से न तक के अक्षर तालू के अगले हिस्से से जीभ लगने पर उच्चारित होते हैं। सभी व्यंजनों के जोड़े ऐसे ही विभक्त हैं। हिंदी इतनी उदार है कि उसने हर दौर में नए शब्दों और मुहावरों को शामिल किया। अरबी से तारीख और औरत ले लिया तो फारसी से आदमी आबादी, बाग, चश्मा और चाकू। तुर्की से तोप और लाश, पोर्चूगीज से पादरी, कमरा, पलटन और अंग्रेजी के तो अनगिनत शब्दों ने हिंदी से भाईचारा बना लिया है। डॉक्टर, पैंसिल, कोर्ट, बैंक, होटल, स्टेशन को कौन अंग्रेजी शब्द मानता है। अंग्रेजी हमारी हुई, हम कब अंग्रेजी के हुए। हिंदी भाषा पर इतने फक्र की वजह, बेवजह नहीं है। हाल ही...