मानसिक दिव्यांग बच्चे जैसे हैं, उन्हें स्वीकारे

आपका धैर्य ही मानसिक दिव्यांग बच्चों की ताकत -डॉ राठी  

 उन अभिभावकों की चिंता थी कि उनका बच्चा सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में उनके साथ नहीं जाता,कभी बहुत शांत होता है तो कभी बहुत गुस्से में ,मोबाइल फोन के लिए हिंसक हो जाना और किसी भी एक चीज़ के लिए जुनून की हद लांघ देना जैसी मुश्किलों का क्या कोई इलाज है भी या नहीं। वे अपने बच्चों को खुश देखने के लिए सब कुछ कर सकते हैं लेकिन कोई राह नहीं मिलती। इन तमाम चिंताओं को जब मानसिक तौर पर  दिव्यांग बच्चों के माता-पिता ने संस्था में साझा किया तो उनके चेहरे पर राहत के भाव थे। 


इंदौर सोसाइटी फॉर मेंटली चैलेंज्ड संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में  साइकाइट्रिक एवं बिहेवियर प्रॉब्लम विशेषज्ञ डॉक्टर पवन राठी ने बताया कि बेशक इन बच्चों के साथ थोड़े अतिरिक्त प्रयास करने होते हैं लेकिन असंभव कुछ भी नहीं है। उन्हें आपके  धैर्य और समय दोनों की जरूरत होती है। आप देखेंगे कि यह व्यवहार बच्चे परिवार और अपने आस-पास के माहौल से ही लेते हैं। आपको उस माहौल को समझना है। डॉ राठी ने कहा कि उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों पर भी खुश होना चाहिए। ये बहुत अतिरिक्त मेहनत से उसे हासिल करते हैं। बच्चों को छोटे-छोटे टास्क दीजिये।बच्चा जैसा है, वैसा स्वीकार करना ही पहली जीत होती है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों में गुस्सा बहुत आम है जिसे उनके मन के काम से जोड़ कर कम किया जा सकता है। बच्चों के विकास पर ध्यान देना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए लगातार  प्रोत्साहित करना काफी मददगार होता है। हर दिव्यांग बच्चे में बड़ी खूबी होती है जिसे समझना होता है। 

कार्यशाला में अभिभावकों ने अपने कई सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे। इससे पहले संस्था सचिव जयंत चांदोलीकर जी ने डॉक्टर पवन राठी और प्रवीण श्रीवास्तव जी का परिचय दिया। संस्था संरक्षक श्री यशवंत पंजवानी जी ने सभी अभिभावकों, डॉक्टर राठी और श्रीवास्तव जी का आभार व्यक्त किया। हैप्पी होम के डायरेक्टरप्रवीण श्रीवास्तव  ने कहा कि सबसे पहले घर के सदस्य ही थैरेपिस्ट का कार्य करते हैं। संस्था की मुख्य प्रशासिका शशि दुबे ने बतया कि अभिभावकों के लिए यह चर्चा सार्थक रही और 
डॉक्टर राठी और प्रवीण श्रीवास्तव जी ने समय-समय पर संस्था में आकर गाइडेंस देने का आश्वासन दिया है।

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