जाना लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप सितंबर 24, 2011 जाना कितना मुश्किल है किसी रूह का रूह के भीतर जाना हमारे बीच कैसे हँसते-खेलते हो गया सब पाक जज़्बे-सा यह गठजोड़ .... मेरा शीश अब वहीँ झुका जाता है मेरा शिवाला वही मेरा काबा वहीँ फिर भी मैं हूँ काफ़िर तो वही सही . लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ प्रवीण पाण्डेय24 सितंबर 2011 को 10:28 pm बजेसमर्पण में छिपा है अध्यात्म।जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंके सी 24 सितंबर 2011 को 11:21 pm बजेफिर भी मैं हूँ काफ़िर तो वही सही .जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंSmart Indian25 सितंबर 2011 को 2:59 am बजेहृदयस्पर्शी! हम वही रहते हैं जो हैं, लोग चाहे कैसी भी छवि बनायें! दुनिया खोने का डर नहीं मुझेमेरी फ़िक्र खुद के खोने की है।जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंवाणी गीत25 सितंबर 2011 को 5:53 am बजेइस ज़ज्बे को नमन!जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंmukti25 सितंबर 2011 को 2:48 pm बजेफिर भी मैं हूँ काफ़िर तो वही सही .जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंKavita Saharia26 सितंबर 2011 को 10:09 am बजेHeart touching expression.जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंरंजना28 सितंबर 2011 को 9:40 pm बजेवाह...पवित्र पावन भावोद्गार...जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंvarsha1 अक्टूबर 2011 को 4:05 pm बजेpraveenji, kishoreji, anuragji,vaaniji,aradhna, kavita and ranganaji bahut-bahut shukriya.जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंvarsha1 अक्टूबर 2011 को 4:06 pm बजेranjanaji thanks.जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
समर्पण में छिपा है अध्यात्म।
जवाब देंहटाएंफिर भी मैं
जवाब देंहटाएंहूँ काफ़िर तो
वही सही .
हृदयस्पर्शी! हम वही रहते हैं जो हैं, लोग चाहे कैसी भी छवि बनायें!
जवाब देंहटाएंदुनिया खोने का डर नहीं मुझे
मेरी फ़िक्र खुद के खोने की है।
इस ज़ज्बे को नमन!
जवाब देंहटाएंफिर भी मैं
जवाब देंहटाएंहूँ काफ़िर तो
वही सही .
Heart touching expression.
जवाब देंहटाएंवाह...पवित्र पावन भावोद्गार...
जवाब देंहटाएंpraveenji, kishoreji, anuragji,vaaniji,
जवाब देंहटाएंaradhna, kavita
and ranganaji bahut-bahut shukriya.
ranjanaji thanks.
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