अपने जीते जी मैं कभी शृंगार नहीं करूंगी लेकिन अंत्येष्टि के समय वे मुझे सजा देंगे। वसीयत में साफ-साफ लिख देने पर वे ऐसा नहीं करेंगे । क्यूं लिखूं मैं? करने दो उन्हें, जिंदगी में एक बार मैं खूबसूरत लगूंगी -वेरा पावलोवा वेरा रूसी कवयित्री हैं, जो शायद अपने सादगी पर फिदा हैं और इसी को ही अंतिम सांस तक कायम रखना चाहती हैं। कोई ख्वाहिश नहीं सुंदर दिखने की फिर भी एक ख् वाहिश कि मरने के बाद भी खूबसूरत लगूं। सुंदर दिखना हम में से हरेक की चाहत होती है, लेकिन क्या सुंदरता केवल लिबास और अंगों की होती है। मुझे तो छतीसगढ़ के बस्तर जिले में जगदलपुर के पास कोटमसर गांव की वह आदिवासी स्त्री भी बहुत खूबसूरत लगती है जो सड़कों पर धान फैला रही होती है और वह मेवाती स्त्री भी जो अलवर के गांव में प्याज़ उगा रही है। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल की वे स्त्रियां भी जिन्होंने अपने दम पर खोए हुए वन फिर से विकसित कर लिए हैं। अपने पुरुषों का पलायन रोक दिया है। उन्होंने अपना पानी, अपना चारा, अपना ईंधन तो पाया ही है, अपना स्वाभिमान भी ऊंचा रखा है। वे बारी-बारी से इस वन की रक्षा करती हैं। इसके लिए ...