प्यार के चार अक्स

मेरे पास
तन्हाई के रैपर में
लिपटी हुई
तुम्हें नहीं मालूम
तन्हाई के रैपर में
लिपटी हुई खुशियों के मायने
इसके खुलते ही मैं
समां जाती हूँ इसमें
सारा जुनूं
बस तुम्हारे करीब
रहने का है।
तुम्हारी यादों की
नम मिटटी में बने शामियाने
में शाम गुज़ारने का है।
2
ये जो मेरे भीतर भरा है
तेरे लिए प्रेम
चाहती हूँ
यह ऊष्मा
संचारित हो जाए
किसी जोड़े में
प्यार की सबसे ज़यादा दरकार
ज़िंदा कौमों को है .

कभी कहा था
तुम बिन
नहीं होगा जीना
फिर, ये कौन जीए जाता है
एक बुत
ताबूत से बना.
4
वह दुनिया का
सबसे लम्बा चुम्बन था
समय के फैर में कौन पड़ता
वह तो गुम थी युगों के लिए.
आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (14.02.2014) को " "फूलों के रंग से" ( चर्चा -1523 )" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है,धन्यबाद।
चारों अक्स बेहद सुन्दर !
जवाब देंहटाएंसाभार !
बड़ी ही सुन्दर रचनायें।
जवाब देंहटाएंये जो मेरे भीतर भरा है
जवाब देंहटाएंतेरे लिए प्रेम
चाहती हूँ
यह ऊष्मा
संचारित हो जाए
किसी जोड़े में
प्यार की सबसे ज़यादा दरकार
ज़िंदा कौमों को हैl
बहुत सुन्दर
new post बनो धरती का हमराज !
सुन्दर रचनायें।
जवाब देंहटाएंसुंदर प्रस्तुति...
जवाब देंहटाएंअति सुन्दर रचनायें..
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