फरेब

बड़े बवंडर थाम लेती हैं ये पलकें याद का तिनका तूफ़ान ला देता है पथरीले रास्तों में संभल जाती है वो नन्हा- सा एक फूल घायल कर देता है सेहरा की धूप नहीं जला पाती उसे बादल का एक टुकड़ा सुखा देता है कभी तो आओ मेरे सुकून ए जां क्यों सब गैर ज़रूरी दिखाई देता है आज हर तरफ परचम और रोशनी है लोगों को इसमें भी फरेब दिखाई देता है