स्त्री-पुरुष संबंध, सृष्टि की बेहद भरोसेमंद बुनियाद। परस्पर विपरीत होकर भी एक-दूसरे के लिए समर्पित । ऐसा समभाव जहां न कोई छोटा न बड़ा। बावजूद इसके जब हम आधी दुनिया में झांकते हैं तो यह खूबसूरत कनेक्शन एक कुंठित कनेक्शन बतौर सामने आता है। इस कुंठा से घर भी महफूज नहीं। हर चेहरे की अपनी कहानी है। सदियों से होते आए व्या भिचार में आज बड़ा टि्वस्ट आया है। आज की लड़की तूफान से पहले ही किसी सायरन की तरह गूंज जाना चाहती है.. हर कहानी के पहले चंद पंक्तियां होती हैं-`इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं। इनका सच होना महज संयोग हो सकता है, लेकिन हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि खुशबू की कथा के सभी पात्र सच्चे हैं और इनका सच होना महज संयोग नहीं, बल्कि वास्तविक होगा।´ सजला अपने नाम के उलट थी। रोना-धोना उसकी फितरत के विपरीत था, लेकिन आज आंखें बह रही थीं। पन्द्रह साल की काव्या ने जो यथार्थ साझा किया था, उसे सुनकर वह कांपने लगी थी। काव्या ने बताया कि पिछले रविवार जब हम मौसाजी के घर गए थे तो ऊपर के कमरे में काव्या को अकेली देख उन्होंने उसे बाहों में भींचकर किस करने की कोशिश की। काव्या ने अपने पू...