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घर से दुनिया तक नज़रा गया प्रेम

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यह पृथ्वी अगर हमारा घर आंगन है तो यह आंगन नज़रा गया है। किसी बुरे साए के असर में है जो अब भी इससे मुक्त होने की कोशिश नहीं हुई तो हम एक बेहद कमज़ोर समाज और खोखली दुनिया का हिस्सा होंगे। हमने कभी इस गोले को कोई दिठौना या काला टीका नहीं लगाया क्योंकि उससे कभी प्रेम ही नहीं किया। अपने भीतर के प्रेम को भी किसी केंचुली की तरह उतार कर कभी ना ख़त्म होने वाली चूहा दौड़ में शामिल हो गए । क्या पड़ोस ,क्या सड़क ,क्या शहर ,क्या प्रदेश ,क्या देश ,क्या द्वीप, क्या महाद्वीप सब बढ़-चढ़ कर यह बताने में लगे हैं कि कौन कितनी जल्दी प्रेम से ख़ाली हो सकता है। इस रास्ते के सबसे ज़लील मुसाफ़िर वही हैं जिनके पास ताक़त है। इनका व्यवहार ऐसा है कि जैसे धरती से प्रेम की पूरी फ़सल सुखाने की संधि की हो। इनके हाथ परमाणु बटन होना भी ख़तरनाक है। वे हर दिन संत वैलेंटाइन को ठेंगा दिखाते हैं। नया यह है कि नफ़रत को इन्होंने सुंदर पैकेजिंग में बेचना शुरू कर दिया है और इसे बनाने की फैक्ट्री में जाने कितनों को प्रशिक्षण देकर भी लगा दिया है। घृणा क़ारोबार है। आखिर कैसे मूल्यों की इस गिरावट से बचा जा सकता है? इस बीमारी की नब्ज़ पकड़ में आ सकती ...

इस चमन में बस हम ही हम खिलेंगे

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बीता सप्ताह  सरकार के लिए कुछ ज़्यादा ही  चुनौती भरा हो गया। यूं हमारी  सरकार जो भरपूर यक़ीन के साथ अपनी ही मस्त चाल में चलती है, इस हफ़्ते कुछ कसमसाती और डगमगाती नज़र आई।  डगमगाने का ताल्लुक़ बहुमत के लिए ज़रूरी किसी संख्याबल में कमी-बेशी से नहीं बल्कि उन मुद्दों से है जिनका असर आने वाले कई हफ़्तों तक रहने वाला है। पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब के हिस्सों को लोकसभा में पढ़ने देने की नेता प्रतिपक्ष की ज़िद ने पूरे देश को यह बता दिया कि किताब में ज़रूर कुछ ऐसा है जिसे सरकार देश पर ज़ाहिर होने देना  नहीं  चाहती।  बताना ही चाहती तो  पिछले पंद्रह महीनों से  रक्षा मंत्रालय  केवल समीक्षा ना कर रहा होता । अगर जो किताब में वाक़ई झूठ लिखा है कि साल 2020 में चीनी टैंकों के भारतीय सीमा में घुसने के समय  सरकार ने काफ़ी समय लेने के बाद भी सेना प्रमुख से यह कहा कि आपको जो उचित लगे वह करें और फिर तब से अब तक चुप्पी ओढ़े रखी है तो यह और भी ख़तरनाक़ मालूम होता है। हमारे देश में सेना चुने हुए नेता के आदेश का इंतज़ार करती है। यह पाकिस्तान नहीं जहां...