थप्पड़ में प्यार, हक़ ढूँढ़नेवालो

प्यार से समझाती है थप्पड़ उन लोगों को जिन्हें इसमें खामखां का प्यार और हक़ नज़र आता है। थप्पड़ रिलीज़ हुए एक सप्ताह बीत चुका है और फ़िल्म अपने चाहनवालों और क्रिटिक्स से थपकियाँ और सिसकियाँ भी पा चुकी है। मुझे जो क़िरदार क़रीब लगा वह दीया मिर्ज़ा का है। वह ऐसी स्त्री है जो अपने प्रेम को खो चुकी है लेकिन ख़ुश है अपनी बिटिया और अपने काम के साथ। क्योंकि उसने जो पाया है वह इतना भरपूर है कि कोई तमन्ना अब बाक़ी नहीं रही। वह कहती भी है उसके साथ सबकुछ एफर्टलेस था। लेकिन आम भारतीय स्त्रियां जानती हैं कि उनकी पूरी गृहस्थी उन्हीं के एफर्ट्स पर टिकी हुई है जिसमें थप्पड़ ,जबरदस्ती, उनका कॅरिअर छोड़ना सब सामान्य है। अमृता एक ख़ुशहाल ज़िन्दगी जी रही है। होममेकर है। परिवार के लिए पूरी तरह समर्पित। एक पार्टी में उसके पति विक्रम का झगड़ा अपने सीनियर्स से होता है और अमृता इस झगड़े को रोकना चाहती है। इसी तना-तनी में वह अमृता को थप्पड़ मार देता है। उस समय लगता है जैसे वही उसके लिए सबसे सॉफ्ट टारगेट थी अपना ग़ुस्सा जताने के ...