बैन का बैंड

ये बैन संस्कृति कुछ ज्यादा ही लोकप्रिय हो गई है देश में। सलमान रश्दी लिखित शैतान की आयतें,(द सैटेनिक वर्सेस) नहीं पढ़ सकते क्योंकि बैन है। तस्लीमा की पुस्तक लज्जा से रूबरू होना है, बैन है। वेंडी डॉनिगर (द हिंदूज) ने हिंदुत्व पर ठीक से नहीं लिखा, बैन है। द रेड साड़ी, सोनिया गांधी पर लिखी जेविअर मोरो की किताब पढऩी है, बैन है। फिल्म किस्सा कुर्सी का बैन है क्योंकि इसमें आपातकाल का मजाक उड़ाया गया है। गुजरात में फना बैन है। ग्रीन पीस की प्रिया पिल्लई की लंदन यात्रा बैन है। कुछ देर के लिए आंखें बंद कर फर्ज किया कि मैं निर्भया हूं और मेरे मरने के बाद एक डॉक्युमेंट्री बनती है जिसमें मेरा अपराधी कह रहा है कि लड़कियों को रात में लड़के के साथ घर से नहीं निकलना चाहिए। कपड़ों का खयाल रखना चाहिए। हम उसे सबक सिखाना चाहते थे। यकीन मानिए मैं पसीने से नहा गई, हलक सूख गया कि मेरे साथ निर्भया जैसा घटा है लेकिन मुझे अपराधी ड्राइवर मुकेश की बातों पर कोई अचरज नहीं हुआ। यह सोच कोई नई नहीं है। बचपन से ही लड़कियों से यही तो कहा जाता है। आज भी जब बचपन के बाद युवावस्था की दहलीज भी पार होने ...