आखर बंदी

ये कौन बांधे है तुझे-मुझे अब भी जन्म में यकीं नहीं कच्ची उम्र को गुज़रे अरसा हुआ तेरे हर्फ़ बस यही बिखरे पड़े हैं मेरे चारों ओर कभी सहलाते हैं कभी तकरार करते हैं कभी बरस जाते हैं मुझ पर गहरे भिगो देते हैं भीतर तक मैं इन आखरों की बंदी हूँ ये आखर-बंधन मैंने लिया है सात फेरों की तरह. इस जन्म के लिए जीते जी . image: varsha हर लो मेरा चैतन्य -------------------------- तुम नहीं जानते तुमने अनन्या मान कितना अन्याय किया है मेरे साथ मैं अचेत ही भली थी अब जब चेतना मुझे छू गयी है मुझे तुन्हारे सिवा कुछ नज़र नहीं आता हर लो मेरा चैतन्य दे दो जड़ता मुझे इस दुनिया में जीने के लिए कह दो कि मेरा-तुम्हारा कुछ नहीं आजाद करो मुझे इस मोहपाश से जानो तुम यह सब क्या तुम नहीं जानते ?