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खटाखट बदल रहें हैं समीकरण

  इंदौर-जयपुर यात्रा के लिए रात को चलने वाली इंटरसिटी बेहतरीन ट्रेन है। हफ्ते में केवल दो दिन चलती है। रात को बैठो और सुबह शहर आ जाता है। बीते शनिवार मेरी बर्थ के सामने एक सज्जन थे। टीटीइ के आने पर उन्होंने  परिचय में अपना पूरा नाम बताया। ललाट पर तिलक था और सर पर चोटी। रात भर के खर्राटों के बाद सुबह वे जागे और जयपुर से कोई दो सब स्टेशन पहले बोलने गुस्से में बोलने लगे–" बेकार शहर है ये। पुलिस सुनती नी यहां की। एमपी में ऐसा नी है। सरकार सुनती है हमारी। लोगों ने झूठी शान दिखा कर मेरे बेटे की शादी यहां करा दी। ग़लत कामों में लिप्त है परिवार।” किसी ने कहा –"यहाँ भी आप ही की सरकार है, क्या दिक्कत है।" हां है न पर सुनवाई नी है , राजिनामा करने जा रहा हूं।” कहकर सज्जन गुस्से में ही उतर गए। पड़ोस में एक राजस्थानी परिवार बैठा हुआ था, उन्होंने सज्जन के जाते ही तकियों की और इशारा किया जो एक, दो नहीं पूरे तीन थे। रेलवे एक बर्थ पर एक तकिया देता है। बातों –बातों में राजस्थान के लोकसभा चुनाव की चर्चा भी चली। यहां काफी लोग इस बार इंडिया गठबंधन को 25 में से पांच से सात सीटें दे रहें हैं। इस ...