संदेश

मार्च, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

'नो अदर लैंड' तब जाएं तो जाएं कहां ?

चित्र
तानाशाहों को हमेशा लगता है कि कला जैसे उनके लिए काल बन कर आ रही है इसलिये वे जब-तब कभी कलाकार पर तो कभी उसके काम पर हमला बोलते रहते हैं। पूरब से पश्चिम तक मामला एक सा ही है, तभी तो तीन सप्ताह पहले ऑस्कर से सम्मानित बेस्ट डॉक्यूमेंटरी 'नो अदर लैंड' के चार निर्देशकों में से एक हमदान बलाल पर सोमवार को उन्हीं के गांव में इज़रायली सेना का हमला न होता। अगले दिन जब उन्हें रिहा किया जाता है तब  उनके सर और शरीर पर चोट के निशान मिलते हैं।    'नो अदर लैंड' के चार निर्देशकों में से दो फ़िलीस्तीनी हैं और दो इज़राइली। चार सह-निर्देशकों बासल अद्रा , हमदान बलाल , युवाल अब्राहम और रेचल  सोर की बनाई पहली ही डॉक्यूमेंटरी ने ऑस्कर जीता है और पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बन गई है। नो अदर लैंड डॉक्यूमेंटरी के ज़रिये इन चारों का मकसद था कि साथ में हमारी आवाज़ ज़्यादा बुलंद होगी और ऐसा हुआ भी। ऑस्कर समारोह में जब इज़रायली पत्रकार युवाल अब्राहम ने अपने फ़िलीस्तीनी सह- निर्देशक बासल अद्रा की ओर देख कर कहा - "जब मैं बासल को ...

आजा ग्रोक ले..

चित्र
एआई का नया टूल ग्रोक कुछ ज़्यादा ही मज़ेदार और चतुर मालूम होता है और x के यूजर आजा नाच ले की तर्ज़ पर इन दिनों आज ग्रोक ले में दिलचस्पी ले रहे हैं क्योंकि ग्रोक जहां गाली दे रहा है वहीं नेताओं की बखिया भी उधेड़ रहा है। सरकार एक्शन लेने पर विचार कर रही है लेकिन इलोन मस्क की टीम एक अन्य मामले में पहले ही सरकार के ख़िलाफ़ कर्नाटक हाई कोर्ट में पहुंच गई है  बीते साल इन्हीं दिनों दुनिया के सबसे बड़े उद्योगपति इलोन मस्क भारत आने वाले थे। आम चुनावों के बावजूद भारत सरकार पलक-पावड़े बिछाकर उनके स्वागत की तैयारी में लगी थी कि अचानक  मस्क ने अपनी यात्रा रद्द कर दी। उन्होंने कहा कि टेस्ला में मसला हो गया है क्योंकि कम बिक्री की वजह से वे स्टाफ में दस फ़ीसदी की कटौती करने जा रहे हैं। ख़ुद  मस्क तो तब नहीं हीं आए लेकिन इस साल उनका आर्टिफिशियल  इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से जुड़ा टूल ग्रोक-3 आ गया और आकर तहलका मचा रहा है।  मस्क के एक्स (पहले ट्विटर) पर एआई जनित ग्रोक ने ऐसे-ऐसे जवाब दिए हैं कि सियासी दलों को समझ ही नहीं आ रहा कि इसका क्या तोड़ लाएं। जो ख़ुश है वह इसलिए कि आख़िर कोई तो...

ये रोज़ी कमाने वाले रोटी क्यों नहीं बनाते

चित्र
आख़िर क्यों भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या लगातार घट रही है ?यहां तक की भूटान, नेपाल और अरब देश भी हमसे आगे हैं और पाकिस्तान केवल एक पायदान ही नीचे। आज महिला दिवस के दिन इन कारणों का जानना बहुत ज़रूरी है कि दिन-रात के परिश्रम के बाद भी उसके हिस्से घुटन और आर्थिक निर्णय ना ले पाने की मजबूरी क्यों  है ? एक फ़िल्म ने जैसे इस पर बात करने के लिए सबको दिशा दे दी है कि केवल मिसेज़ बने रह कर हालात नहीं बदले जा सकते  पुरुष यूं तो रसोई में सादियों से है और क्या खूब है लेकिन जब बात परिवार की रसोई में कामकाज  की आती है तो वह गायब होते हैं जैसे खाने से नमक। परिवार नामक इकाई में खाना बनाना केवल स्त्री का दायित्व है। पुरुष कभी-कभार किचन में आते भी हैं तो वह किसी उत्सव से कम नहीं होता। प्याज़, टमाटर,मसाले तैयार कर दो, साहब मसालेदार डिश बना देंगे। फिर घर में सिर्फ वाह-वाही होगी। बातें होंगी  कि साहब यूं तो बाहर जाकर रोज़ी कमाते हैं लेकिन आज तो रोटी भी बनाई है। महिलाओं के जिम्मे खाना बनाने का यह काम हमेशा बिना भुगतान के ही रहा है। हिसाब लगाया जाए कि जो काम महिलाएं घर में करती हैं, उसे च...

मिसेज़ ही क्यों रसोई की रानी Mr. क्यों नहीं?

चित्र
आख़िर क्यों भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या लगातार घट रही है ?यहां तक की भूटान, नेपाल और अरब देश भी हमसे आगे हैं और पाकिस्तान केवल एक पायदान ही नीचे। आज महिला दिवस के दिन इन कारणों का जानना बहुत ज़रूरी है कि दिन-रात के परिश्रम के बाद भी उसके हिस्से घुटन और आर्थिक निर्णय ना ले पाने की मजबूरी क्यों  है ? एक फ़िल्म ने जैसे इस पर बात करने के लिए सबको दिशा दे दी है कि केवल मिसेज़ बने रह कर हालात नहीं बदले जा सकते  पुरुष यूं तो रसोई में सादियों से है और क्या खूब है लेकिन जब बात परिवार की रसोई में कामकाज  की आती है तो वह ऐसे गायब होते हैं जैसे खाने से नमक। परिवार नामक इकाई में खाना बनाना केवल स्त्री का दायित्व है। पुरुष कभी-कभार किचन में आते भी हैं तो वह किसी उत्सव से कम नहीं होता। प्याज़, टमाटर,मसाले तैयार कर दो, साहब मसालेदार डिश बना देंगे। फिर घर में सिर्फ वाह-वाही होगी। बातें होंगी  कि साहब यूं तो बाहर जाकर रोज़ी कमाते हैं लेकिन आज तो रोटी भी बनाई है। महिलाओं के जिम्मे खाना बनाने का यह काम हमेशा बिना भुगतान के ही रहा है। हिसाब लगाया जाए कि जो काम महिलाएं घर में करती हैं, उ...