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जनवरी, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

26 और 30 गठन-पतन की दो तिथियां

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जनवरी महीने की ये दो तारीखें हैं तो एक दूसरे के बेहद क़रीब लेकिन  भारत के उत्थान और पतन की कहानी एक साथ सुनाती हैं।   26 को जहां हमने आत्मबोध और वजूद को शब्द दिए;देश को विधान दिया , 30 को उसी बोध को ध्वस्त किया था।  26 जनवरी 1950  को देश की महान सोच को अंगीकार करने के बाद बना संविधान लागू हुआ और 30 जनवरी 1948 को जिन बापू ने बिना खड्ग और ढाल के भारत के स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया, उनकी हत्या कर दी गई। उस फ़क़ीर की जिन्हें सुभाष चंद्र बोस ने राष्ट्रपिता और रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने महात्मा कहा था। उन्हें ख़त्म किया जिनका केवल लक्ष्य स्वराज और भाईचारा था जो भारत की आज़ादी के साथ नफ़रत को हमेशा -हमेशा के लिए मिटा देना चाहते थे। वे कौन थे जो उनके इन विचारों से कसमसा उठे? किसे लगा कि उनकी जान लेने में ही उनका जीवन है ? इस हत्या का लंबा मातम हमने किया लेकिन कुछ ठोस नहीं कर सके। अब उस मातम को गर्व में बदलने और सही ठहराने के प्रयास सुनियोजित तरीके से जब-तब होने लगे हैं। हत्या को सही ठहराने का नैतिक साहस आख़िर क्यों खाद-पानी पाता है ? इसे पढ़ते हुए  यदि आप मेरे विचार ...

दोनों ही करते हैं 80 और 20

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15 अगस्त को मिली आज़ादी सच्ची आज़ादी नहीं राजनीतिक आज़ादी थी। देश को सच्ची आज़ादी तो उस दिन मिली जिस दिन राम मंदिर की प्रतिष्ठा हुई। आख़िर इस बात के मायने क्या हैं ? निर्माण तो राम मंदिर का भी संविधान सम्मत तरीके से ही हुआ, तब भी यह कहना क्या सही होगा कि देश में संविधान का पालन नहीं हो रहा है ? क्या वाक़ई शहीदों को नमन करने और 15 अगस्त, 26 जनवरी को कौमी तराने गाने का कोई अर्थ नहीं है? अब हम सब केवल राम मंदिर निर्माण के दिन भजन गाएं और केवल इसी दिन गर्व से भर जाएं ? क्या दोनों को जोड़ना ठीक है ? अब क्या अंग्रेजों के दमन को भूल जाएं और यह भी कि गोरों से मिली स्वतंत्रता के बाद ही हमें तमाम तरह की अतीत की बेड़ियों से भी आज़ादी मिली थी। इससे पहले एक अभिनेत्री ने भी कहा था कि देश को असली आज़ादी तो 2014 में मिली है।आख़िर शहीदों के संघर्ष और लहू से मिली इस आज़ादी को कोई भी कम करके क्यों देखना चाहता है ? क्या ऐसा है कि एक वर्ग स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को भी नए सिरे से लिखना चाहता है और जो इसमें शामिल नहीं थे, उनकी नैतिकता भी बची रहे ?अगर नहीं तो फिर  इससे तकलीफ़ क्या है ? इत...

दुनिया को खरीदने चले कारोबारी नेता

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लगता है कारोबारी से नेता बने राष्ट्राध्यक्ष अपनी दूसरी पारी में दुनिया को खरीदने की चाह में निकल पड़े हैं।  अभी डोनाल्ड ट्रम्प को अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने में एक सप्ताह से भी ज़्यादा का समय बाक़ी है लेकिन उनके बातें भरी गगरी की तरह छलक-छलक जा रही हैं। उनकी ताज़ातरीन बयानबाज़ी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। खासकर यूरोप और कनाडा पर तो ट्रम्प जैसे भरी सर्दी में भीषण बर्फ़ीला तूफ़ान ला रहे हैं। पहले मैक्सिको फिर कनाडा को अपना 51 वां राज्य बनाने का मंसूबा उन्होंने जगज़ाहिर कर दिया है। इसे कुछ इस तरह भी समझा जा सकता है कि अपने अच्छे संबंधों के दौर में  भारत बांग्लादेश के लिए यह कह देता कि उसे भारत का 29 वां राज्य बन जाना चाहिए क्योंकि वहां से घुसपैठ ज़्यादा हो रही है जो उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है और समूचे दक्षिण एशिया की शांति और तरक़्क़ी के लिए ऐसा होना बहुत अच्छा है। अपनी तमाम मदद और सरंक्षण के बावजूद भारत के किसी प्रधानमंत्री ने कभी  बांग्लादेश के लिए  ऐसा कोई जुमला नहीं कहा क्योंकि जिस विस्तारवादी नीति के कारण चीन पूरी दुनिया के निशाने पर रहा है, वही रवैया अब ट्रंप...

गुनाहों की माफ़ी मांगने का समय !

अच्छा है कि यह नया साल अपने गुनाहों की माफ़ी मांगने का शगुन लाया है, तभी तो उस प्रदेश के मुखिया ने अपनी ही जनता से माफ़ी मांग ली  है जो बीते 20 महीनों से चीत्कार कर रही है। राज्य जो जनजातीय संघर्ष में सैकड़ों जानों को ख़त्म होते और हज़ारों परिवारों को बेघर होता देख चुका है। शेष भारत भले ही अपने इस खूबसूरत हिस्से को उत्तर पूर्व की सात बहनों के नाम से जानता हो लेकिन यहां की बहनों को दंगाइयों क़ी भीड़ के साथ सड़कों पर निर्वस्त्र दौड़ते देख चुका हैं। इस हिंसा में चूक किसकी है, इसकी कोई ज़िम्मेदारी अब तक किसी की तय नहीं हुई है,कोई इस्तीफ़ा हमने नहीं देखा है लेकिन अच्छी बात है कि एक माफ़ीनामा आया है। मणिपुर हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने राज्य की जनता से माफी मांगी है। कहा कि 24 दुर्भाग्यपूर्ण समय था, हमें सब भूलकर आगे बढ़ना होगा। साल के आखरी दिन मणिपुर के मुख्यमंत्री ने कहा -मैं" बहुत अफ़सोस महसूस कर रहा हूं और राज्य के लोगों से कहना चाहता हूं कि जो कुछ भी पिछले 3 मई 2023 से आज तक हुआ, उसके लिए मैं माफी चाहता हूं। इस दौरान बहुत से लोग अपने प्रियजनों को ख...