ओ स्त्री पहले सीटें बढ़ाएंगे फिर आरक्षण देंगे
सरकार का एक पैटर्न है। जब सब-कुछ निर्धारित और सुनियोजित तरीक़े से होता है तो वह कमाल का प्रभाव छोड़ती है और जहां कहीं कोई मामला या मुद्दा अचानक सामने आ जाता है तब वह गहरी चुप्पी साध लेती है या गड़बड़ा जाती है। फिर चाहे वह किसी देश के नेता के लिए अचानक शोक व्यक्त करना ही क्यों ना हो, उसे काफ़ी समय लगता है। अब यह सोच लेना कि नारी वंदन विधेयक के साथ नत्थी परिसीमन विधेयक के पारित ना हो पाने की आशंका सरकार को नहीं रही होगी ऐसी मासूमियत पर फ़िदा हो जाना ही बेहतर है। अचानक बुलाए सत्र में यह तयशुदा नतीजा था क्योंकि इसके बाद से ही प्रधानमंत्री, सरकार के बड़े मंत्री,मुख्यमंत्री पार्टी का महिला मोर्चा जिस तरह विपक्ष को घेर रहे हैं, वह बड़ी तैयारी को ज़ाहिर करता है। बिल को परिसीमन से जुड़े 131 वें संविधान संशोधन से ना जोड़ महिला आरक्षण के विरोध से जोड़ने के हर प्रयास जारी हैं । फिर क्या जानबूझ कर ऐसी ही पटकथा रची गई ? उत्तर बनाम दक्षिण अब बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। 24 घंटे चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी के सामने अब भी दो राज्यों तमिलनाड़ु और पश्चिम बंगाल के चुनाव शेष हैं और रसोई ग...