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अजमेर में 'संभल'ना होगा

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उत्तरप्रदेश के संभल में चार भारतीय नागरिक मारे गए। कोई भी जांच या बातचीत केवल यह मानकर शुरू क्यों नहीं हो सकती। इस हिंसा को समुदाय के नज़रिये से क्यों देखा जाना चाहिए ? नहीं देखा जाएगा क्योंकि ऐसे तटस्थ रवैये में वह कवरेज कहां जो गर्मागर्म मुद्दों को लपक ले। शाम की हिंसक बहस फिर कहां होगी ? मंदिर -मस्जिद विवाद में घेरना ही तो मक़सद है। मन्टो की कहानियों को जैसे फिर ज़िंदा करना है जिनमें बंटवारे के बाद कई बेगुनाह मारे गए थे ,कई विक्षिप्त हो गए थे। तब फिरंगी हुकूमत थी। वे जाते-जाते देश तोड़ गए। अपने हिसाब से इतिहास लिखवाया ताकि नफ़रत दोनों और उफनती रहे  अब इस दौर में उन दस्तावेजों को सामने लाया जा रहा है जो उनके मुलाज़िमों ने लिखे। तब क्या देश  फ़िरंगी सरकार से लड़ने वाले शहीदों को अब भुला चुका है। वक़्त का पहिया ऐसे भी घूमेगा कि अब हमारे नायक बदलने लगेंगे? अब क्यों  सबकुछ  नए  सिरे से  खोदने और सद्भावना की जड़ों में खून भेजने की ज़रूरत आ पड़ी है ? अब कौन फायदा लेना चाहता है ? संभल के बाद अजमेर का नंबर लगा दिया गया है।  यह सब तब हो रहा है जब  हिन्दू जाग्रत...

महाचुनाव : सुनामी में भी जलते रहे दीए

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फ़र्ज़ कीजिये कि महाराष्ट्र के चुनावी नतीजे ज़रा उलट होते यानी महा विकास आघाड़ी (कांग्रेस प्लस ) को बहुमत होता तब चुनावी विश्लेषक क्या कह रहे होते ? वे कह रहे होते कि भारतीय जनता पार्टी की तोड़-फोड़ की राजनीति को जनता ने पसंद नहीं किया,पहले उद्धव ठाकरे की शिवसेना को तोड़ा,फिर भी दिल नहीं भरा तब शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को भी तोड़ा ,ईडी, सीबीआई ,आईटी सबकी तलवार नेताओं पर लटकी थी।राज्य में किसानों की एक नहीं सुनी गई और जनता ने 'बटेंगे तो कटेंगे' और 'एक हैं तो सेफ हैं' का कोई असर नहीं लिया। वे कह रहे होते कि महाराष्ट्र के तमाम प्रोजेक्ट गुजरात को दिए जा रहे थे, इससे भी जनता नाराज़ थी और सरकार की 'माझी लाडकी बहीण योजना' भी कोई कमाल नहीं कर सकी क्योंकि यह ठीक चुनाव से पहले शुरू की गई थी।  जनता  महंगाई, बेरोज़गारी से परेशान थी इसलिए महायुति गठबंधन जिसमें सत्ताधारी भाजपा ,शरद पवार से टूटी हुई एनसीपी और उद्धव ठाकरे से टूटी हुई शिवसेना थी, हार गया। कहा जाता कि जनता अपनों से गद्दारी को पसंद नहीं करती, इसीलिए ऐसे चुनावी नतीजे मिले। यह भी कि अदाणी से जुड़े   प्रोजेक्ट ध...

2019 में भारत से आया था ट्रंप-मस्क युग का प्रीक्वल

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महाराष्ट्र के एक शहर में गुजराती परिवार रहता था। लगभग तीन दशक से वहां रहते हुए परिवार अपने व्यवसाय को खासा जमा चुका था। इस काम में   वहां  पहले से  बसे गुजराती उद्योगपति ने उनकी काफ़ी मदद की थी। मन ही मन परिवार के मुखिया उनका बहुत एहसान मानते थे। पहले पहल तो सबकुछ व्यवसाय तक ही सीमित रहा लेकिन फिर उद्योगपति ने उनके घर के फ़ैसलों में दखल देना शुरू कर दिया। मुखिया अपने रुतबे को बरक़रार रखना चाहते थे इसलिए सब स्वीकारते गए लेकिन तक़लीफ़ तब शुरू हुई जब उद्योगपति ने बच्चों के ब्याह-शादियों में भी बोलना शुरू कर दिया। रिश्तों में यह दखल नई पीढ़ी को बर्दाश्त नहीं हुआ। दादाजी के आगे जब आवाज़ ऊंची हुई तो घर में कोहराम मच गया। "इस घर की आन-बान में आग मत लगाओ " दादाजी का सख़्त वाक्य पूरे घर में चेतावनी की तरह गूँज गया। एक पोता अपनी ज़िद में घर छोड़ गया। उसका हश्र देखकर शेष परिवार की फिर कभी हिम्मत नहीं हुई कि कुछ बोले। बाहरी शान यूं ही बनी रही और उस उद्योगपति की हर मर्ज़ी का पालन उस घर में होने लगा  अक्सर बच्चे कसमसाते कि हम पर कुछ ज़्यादा समझोते लादे जा रहे हैं लेकिन बोलता कोई कुछ नहीं...

अमेरिका ने चली ट्रम्प की चाल !

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बेशक़ अमेरिका ने इस बार ट्रम्प की चाल ही चली है। पिछली बार ना तो उसे हिलेरी की चाल समझ आई थी और ना इस बार कमला हैरिस की। उसे तो केवल ट्रम्प की मतवाली चाल और बालों में उभरा फुग्गा ही नज़र आया और पसंद भी। बचपन में ताश के पत्तों में तीन-दो-पांच खेल बहुत लोकप्रिय था। जिसके पास ज़्यादा हुकुम या ट्रम्प के पत्ते होते थे, जीत उसी की होती थी। यहां ट्रम्प जीत तो गए हैं लेकिन अमेरिका का जीतना अभी बाकी है। दुनिया में जारी युद्धों का रुकना बाकी है ,अमेरिकी जनता को भी महसूस हुई महंगाई का रुकना बाकी है।इसके अलावा बाकी है कथित घुसपैठियों का जाना,मूल अमेरिकियों को रोज़गार मिलना और इलोन मस्क के हिसाब से तकनीक का केन्द्रीकरण। यही सब वादे थे जो रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनाव से पहले किये थे और अब ऐतिहासिक जीत के साथ वे अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए हैं। एक सदी से भी ज़्यादा समय के बाद ऐसा हुआ है कि कोई हारकर जीता है। 2020 में वे चुनाव हार गए थे और गुस्से में उनके समर्थकों ने कैपिटल हिल पर  हमला बोल दिया था क्योंकि ट्रम्प ने कह दिया था कि यह चुनाव उनसे छल से चुरा लिया गया है। इस बार इसक...