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जून, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

इस 'आपातहाल' को कौन देखेगा

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 तेजबीर को मीना से प्रेम था। तेजबीर चौबीस साल का था और मीना बाईस। हरियाणा के हिसार का यह जोड़ा शादी करना चाहता था। प्रेम को रिश्ते में बांधना चाहता था लेकिन समाज और परिवार इसके ख़िलाफ़ था। वही सत्तर साल पुराना रवैया, जिसे बॉलिवुड की लगभग हर हिंदी फ़िल्म अपनी कहानी में दिखाती आई है। प्रेम पर पहरे, बैरी समाज,पत्थर दिल लोग, दुश्मन ज़माना, क्रूर पिता और भाई वाली ना जाने कितनी फ़िल्में याद की जा सकती हैं, जिनका अंत प्रेमी जोड़ों का भी अंत है। कभी ये मर जाते हैं तो कभी मार दिए जाते हैं। ये दिल की सुनना चाहते हैं लेकिन समाज और व्यवस्था इन्हें रौंद देना चाहते  हैं। दुखद यह है कि इन्हें अपनी इस हरकत पर कोई पछतावा नहीं होता उलटे गर्व का आभास होता है। यह अपराध उन्हें स्वीकार्य है...और फिर हम यह कहने से भी नहीं चूकते  कि भारत दुनिया में सबसे युवा आबादी वाला देश है। क्या कर रहे हैं हम अपनी इस जवान आबादी के साथ । इनके पेपर लीक करा देते हैं, नया कोई रोज़गार सृजित नहीं करते, अग्निवीर लाकर चार साल में उन्हें रिटायर कर देना चाहते हैं और जो बेचारे अपनी मर्ज़ी से ब्याह करना  चाहते हैं, उन्हें गो...

अब यूरोपीय संघ का भी 'राइट' मोड़

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भारत में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी  का  वह  विडियो खूब देखा जा रहा है  जिसमें वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जोश में कह रही हैं-"हेलो टीम मेलोनी"। दरअसल उनके इस जोश और उत्साह की बड़ी वजह है ईयू संसद यानी यूरोपीय पार्लियामेंट के चुनाव। इन चुनावो में जिस तरह से इटली और उनकी पार्टी को जगह मिली है और जिस तरह से यूरोपीय संघ में धुर दक्षिणपंथियों का दबदबा कायम हो गया है, उससे टीम मेलोनी का जोश भी बढ़ा हुआ है। इधर उनकी पार्टी ब्रदर्स ऑफ़ इटली की  ईयू संसद में सीटें बढ़ी हैं तो उधर उदारवादियों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने तो अपने चुनावी अभियान में ही इस बात का तगड़ा प्रचार कर दिया था कि अब इटली तय करेगा यूरोपीय संघ के कायदे-कानून और इसका दफ्तर अब कहीं ओर नहीं बल्कि रोम होगा। इसके बाद 2022 में मेलोनी ना केवल प्रधानमंत्री बनीं बल्कि अब तो यूरोपीय संघ के चुनावों में भी उन्होंने बाज़ी मार ली है। दक्षिण पंथियों के यूरोपीय संघ की संसद में मज़बूत होने का सी...

हम दो हमारे दो परिवार

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यह देखना वाकई मज़ेदार है कि जो कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को  एक साथ निशाना पर लेती थी, अब कह रही है कि मोदी जी को आरएसएस की सुनना चाहिए और काश यह सब संघ प्रमुख ने पहले कहा होता। संघ प्रमुख मोहन भागवत के लिए कई विद्वानों ने भी यही प्रतिक्रिया दी है कि उन्होंने जो अब कहा है बहुत पहले कह देना चाहिए था। साहित्यकार मृणाल पांडे एक्स पर लिखती हैं –जब शरशैया से भीष्म पितामह पांडवों को राजधर्म पर ज्ञान दे रहे थे, द्रौपदी हंसी। सबको बुरा लगा पर युधिष्ठिर ने कहा वह अकारण नहीं हंसती। जब कारण पूछा गया तो जवाब मिला ,"यह सोचकर कि भरी सभा में कौरवों द्वारा घसीट कर लाई गई कुलवधू का चीरहरण हो रहा था ,तब यह ज्ञान कहां था ?"  दरअसल भागवत ने नागपुर में अपने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए  कहा कि प्रचार के दौरान मर्यादा का ध्यान नहीं रखा गया। यह भी नहीं सोचा गया कि इससे समाज में मनमुटाव पैदा हो सकता है। बिना कारण संघ को भी इसमें खींचा गया। तकनीक का सहारा लेकर असत्य बातों को प्रसारित किया गया। क्या विद्या और विज्ञान का यही उपयोग है ? ऐसे देश कैसे चलेगा ? मैं विर...

'प्रधानमैत्री' की भूमिका में आएंगे प्रधानमंत्री !

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ये हैरानी की बात है कि इंडिया गठबंधन की सरकार नहीं बनने के बावजूद उसके समर्थक लगातार ख़ुशी का इज़हार कर रहे हैं। कुछ ऐसा जैसा वे शायद चाहते तो थे लेकिन ऐसा हो जाएगा उसकी उम्मीद उन्हें कतई नहीं थी। कोई लिख रहा है जैसे सुकून उनके भीतर प्रवेश कर गया, जैसे लंबी घुटन के बीच कोई ठंडी हवा का झोंका आ गया हो जैसे अधिनायकवाद और अहंकार के मज़बूत किले भरभराकर ढह गए हैं। बेशक इन नतीजों ने सभी को चौंकाया है। देश जो अपने शासन में केंद्रीकृत होकर राज्यों को भूल रहा था ,वहां अचानक जैसे राज्य तरोताज़ा हो गए हों , राष्ट्र का वैविध्य जैसे फिर खिल उठा हो।  जैसे गुलदस्ते में कई रंग -बिरंगे फूल महकने लगे हों।  सबसे ज़्यादा सीटों वाले उत्तरप्रदेश ने  सबसे ज़्यादा उलटफेर वाले परिणाम दिए, केरल ने भारतीय जनता पार्टी को भी अपना खाता खोलने में मदद कर दी। तमिलनाडु और पंजाब ने एक भी सीट भाजपा को नहीं दी तो दिल्ली, हिमाचल , मध्यप्रदेश,उत्तराखंड तो पूरे के पूरे भाजपा की झोली में समा गए। गुजरात ने एक सीट कांग्रेस को देकर चकित किया तो कश्मीर ने बड़े-बड़े नेताओं को धूल चटा दी। राजस्थान कांग्रेस ने लोकसभा सीटों...

चार जून के बाद क्या होगा?

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  चार जून को क्या होगा या यूं कहें कि चार जून के बाद क्या होगा ? इस यक्ष प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बेक़रार हो चला है। लोक से भी ज़्यादा तंत्र बेचैन दिखाई दे रहा है और मीडिया तो बेसब्र है ही । इतना बेसब्र कि नतीजों से पहले ही आशंकओं की गिरफ़्त में आ गया है। कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक जून को दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक क्या बुलाई आशंकाओं को जैसे बल मिल गया। खड़गे ने साफ कर दिया है कि देश में वैकल्पिक सरकार आ रही है और हम  यूपीए एक और  यूपीए दो की तरह मज़बूत गठबंधन सरकार चलाएंगे।   एक जून को  मतदान का आखिरी चरण संपन्न होगा। मतदान पश्चिम बंगाल में भी है, इसलिए वहां की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने अपना गढ़ छोड़ने से साफ़ इंकार कर दिया है जिसे अवज्ञा भी समझा जा रहा है । मतदान उत्तर प्रदेश बिहार में भी है लेकिन वहां से नेता आ रहे हैं।  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने  पंजाब के होशियारपुर में अपने आखिरी रैली में संत रविदास को खूब याद करते हुए कन्याकुमारी में ध्यानमग्न हुए और उधर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आ...