चिनार की निगेहबानी में चुनाव

मैं उन दो करोड़ लोगों में शामिल हूं जिन्होंने बीते सीजन में कश्मीर की सैर की। सीजन का आखिरी दौर था और होटल, रेस्तरां, ट्रेवल एजेंसियां,ऑटो और शिकारा चलाने वाले बेहद ख़ुश थे कि इस बार खूब टूरिस्ट आए और कई के तो घर,दुकान,गाड़ियों के लोन भी अदा हो गए। यही तसल्ली सड़क और झील किनारे रोज़गार करने वालों और पहलगाम के घोड़े वालों में भी थी। खूब तो ऊनी कपड़े पसंद किये गए, खूब मखमली केसर और अखरोट सैलानी अपने घर ले गए। उनका बस चलता तो घाटी का बेमिसाल मौसम भी साथ ले आते। वह आया भी, तस्वीरों में कैद होकर। फ़ोन की स्क्रीन पर जैसे देवदार और चिनार की खूबसूरती समा गई थी। और भी जो देखने में आया वह था कश्मीर में जारी विकास का काम और साथ में चप्पे -चप्पे पर मौजूद फ़ौज। फौजी जवान दिन-रात डल झील के चारों और अपनी चौकन्नी निगाह और स्टैनगन के साथ मुस्तैद थे।अब यहां चुनाव हैं। सियासी दलों ने ख़म ठोक दिए हैं जो चुनाव में नहीं शामिल होने की बाद कर रहे थे, वे भी अब लौट आए हैं। एक दाल को खतरा यह भी है कि यदि यहां चुनाव नहीं जीते तो उस सोच का क्या होगा जो बीते समय में देश के सामने रखी गई। चुना...