संदेश

अगस्त, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चिनार की निगेहबानी में चुनाव

चित्र
मैं उन दो करोड़ लोगों में शामिल हूं जिन्होंने बीते सीजन में कश्मीर की सैर की। सीजन का आखिरी  दौर था और होटल, रेस्तरां, ट्रेवल एजेंसियां,ऑटो और शिकारा चलाने वाले बेहद ख़ुश थे कि इस बार खूब टूरिस्ट आए और कई के तो घर,दुकान,गाड़ियों के लोन भी अदा हो गए। यही तसल्ली सड़क और झील किनारे रोज़गार करने वालों और पहलगाम के घोड़े वालों में भी थी। खूब तो ऊनी कपड़े पसंद किये गए, खूब मखमली केसर और अखरोट सैलानी अपने घर ले गए। उनका बस चलता तो घाटी का बेमिसाल मौसम भी साथ ले आते। वह आया  भी, तस्वीरों में कैद होकर।  फ़ोन की स्क्रीन पर जैसे देवदार और चिनार की खूबसूरती समा गई थी। और भी जो  देखने में आया वह था कश्मीर में जारी विकास का काम और साथ में  चप्पे -चप्पे पर मौजूद फ़ौज। फौजी जवान दिन-रात डल झील के चारों और अपनी चौकन्नी निगाह और स्टैनगन के साथ मुस्तैद थे।अब यहां चुनाव हैं। सियासी दलों ने ख़म ठोक दिए हैं जो चुनाव में नहीं शामिल होने की बाद कर रहे थे, वे भी अब लौट आए हैं। एक दाल को खतरा यह भी है कि यदि यहां चुनाव नहीं जीते तो उस सोच का क्या होगा जो बीते समय में देश के सामने रखी गई। चुना...

मोदी 3.0, तीसरी 'डेट' में कुछ कम है जोश

चित्र
एक के बाद एक फैसलों को रद्द करना या कदम पीछे लेना इस तीसरे कार्यकाल की ख़ासियत  है या कमज़ोरी। अब तक ऐसे चार बड़े निर्णय  यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता के साथ तीसरी 'डेट' है और पिछली दो से यह काफ़ी कुछ अलग है। पहले जो बला का आत्मविश्वास और भरोसा दिखाई देता था, वह तीसरी में कुछ कम हुआ लगता है। हाल ही में कुछ तीन-चार बातें भी ऐसी हुई हैं कि डेट का पुराना वाला लुत्फ़ जाता रहा। आगे भी मुलाकात के मौके होंगे लेकिन यह पक्के और मजबूत रिश्ते में कितना बदलेंगे यह देखना दिलचस्प होगा। जनता तो डेट के लिए सज-धज कर इंतज़ार में है लेकिन लगता है उसके प्रिय नेता कहीं उलझ रहे हैं। उसे  वे वैसे नहीं लग रहे हैं जैसे वे थे। इस बार वे अपने ही कहे से पलट रहे हैं,पीछे हट रहे हैं।  जो पलटना ही था तो कहा क्यों और जो कहा तो उस  पर अमल क्यों नहीं ? सब जानते हैं डेटिंग बड़ा नाज़ुक मासला है और इसमें इधर-उधर की बात नहीं चलती। खोया-खोया या 'गायब-आया' जैसा पार्टनर कामयाब नहीं होता। एक कार्टूनिस्ट ने तो इस बदलाव पर कार्टून ही बना डाला कि इससे तो अच्छा है कि एक लेटरल सोचने वाला ही रख लिया जा...

बांग्लादेश : सत्ताग्रहियों को मिला कड़ा संदेश

चित्र
बांग्लादेश में राजनीतिक उठापटक से बने हालात, हर उस देश के लिए सबक हैं जिसके हुक्मरां अवाम की आवाज़ को सुननहीं पाते हैं और देश को अराजकता की ओर धकेल देते हैं। अब जाकर कहीं पंद्रह साल से राज कर रही वहां की अवामी लीग पार्टी को यह समझ आया है कि युवा छात्रों के असंतोष को समझने में उससे भूल हुई। अब  निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे इस बात को अपने साक्षात्कारों में लगातार कह रहे हैं कि गलती हुई है। सच है कि देश में सरकार के खिलाफ बने असंतोष के बीच  आरक्षण का मामला ताबूत में अंतिम कील साबित हुआ लेकिन मुद्दे कई और भी थे । तख्ता पलट के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत आ गई हैं। उधर बांग्लादेश की नवगठित अंतरिम सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि भारत से उन्हें सहयोग की आशा है लेकिन दखल की नहीं। वे लगभग चेतावनी देने वाले अंदाज़ में कहते  हैं कि भारत में रहते हुए  पूर्व प्रधानमंत्री   शेख हसीना किसी तरह की बयानबाज़ी ना करें। बेशक  किसी भी देश के लिए उसके अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और खयाल बहुत मायने रखता है। इस उथल-पुथल में वे भी निशाने पर रहे। फिलहाल भारत क...