मिनी स्कर्ट से भी मिनी सोच

'विदेशी पर्यटकों को एयरपोर्ट पर एक वेलकम किट दी जाती है। इसमें एक कार्ड पर €या करें और €या न करें की जानकारी होती है। हमने बताया है कि छोटी जगहों पर रातवात में अकेले न निकलें, स्कर्ट न पहनें।' केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने अपने इस बयान के साथ आगरा में विदेशी पर्यटकों की सहायता के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी 1363 भी जारी किया था लेकिन बात केवल स्कर्ट पर सिमट कर रह गई। रहना गलत भी नहीं €क्योंकि फर्ज कीजिए एक भारतीय सैलानी जो इटली के किसी ऐतिहासिक चर्च का दौरा कर रही हो और उसने साड़ी या शलवार (सलवार नहीं) कमीज पहन रखी हो और उन्हें कोई नसीहत दे कि, अपने कपड़े बदलो और स्कर्ट या कुछ और पहन कर आओ। क्या यह फरमान तकलीफ देने वाला नहीं होगा? आप कहेंगे ऐसा €क्यों किसी को कहना चाहिए? पूरे कपड़े पहनना तो शालीनता है। ऐसा नहीं है। यह हमारी सोच है। हमने यह मानक तय कर लिया है और इसे ही परम सत्य मान लिया है और तो और इसे ही अपनी संस्कृति तक करार दे दिया है। भारत जैसे विशाल देश की संस्कृति में €क्या गोवा, सिक्किम या मणिपुर शामिल नहीं है €क्या वहां का पहनावा हमारा पहनावा नहीं है?...