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सबसे ज़रूरी होता है सायरन की तरह गूंज जाना

"यदि मैं स्त्री के रूप में पैदा होता तो पुरुषों द्वारा थोपे गए हर अन्याय का जमकर विरोध करता तथा उनके खिलाफ विद्रोह का झंडा बुलंद करता" -महात्मा गांधी  रेवा का घर जाने का बिलकुल मन नहीं था। ऑफिस से तेज बाइक चलाकर ईपी में फिल्म देखना चाहती थी। जयपुर के कैफे 'क्यूरियस लाइफ'  में कैपेचिनो का स्वाद लेते हुए स्टेचू सर्कल की रोशनी में नहाते हुए जनपथ से गुजरते हुए बेवजह जेएलएन मार्ग का चक्कर काटना चाहती थी, फिर उसने अपना हुलिया चैक किया। स्लीवलैस टॉप और शॉर्ट्स ! नहीं...आज नहीं। उसने सिर को झटका और वक्त से घर पहुंच गई।  कई बार रेवा का मन करता है कि वह इस शहर को जिए। कभी नुक्कड़वाली पान की दुकान पर ही खड़ी हो जाए, तो कभी थड़ी या गुमटी के बाहर  पड़े  उन मुड्ढों पर चाय की चुस्कियां ले और कभी रैन बसेरे के बाहर खड़ी हो वहां की रात पर भरपूर निगाह डाले। भीषण सर्दी से बचने के लिए बेघर लोगों के लिए जयपुर नगर निगम जगह-जगह रैन बसेरों का निर्माण करता है। एक बार पहुंच भी गई एक रैन बसेरे के बाहर लेकिन  एक पुलिस वाला जो उसे कुछ देर से देख रहा था, बोला- मैडम घर जाओ...यहां अच्छे लोग ...